हरिद्वार/ विकासनगर/ऋषिकेश : बिहार और पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण लोकपर्व छठ का आज तीसरा दिन है. यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, क्योंकि आज के दिन महिलाएं डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और डूबते हुए को अर्घ्य देकर उन्हें फल-फूल समर्पित करती हैं. इसी क्रम में हरकी पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों पर छठ व्रत करने वाली महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली. ऐसा लग रहा था कि यह उत्तराखंड नहीं है, बल्कि बिहार और पूर्वांचल है.
डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा घाटों पर लगी भीड़:अस्तांचल सूर्य को अर्य्घ देने के लिए बिहार और पूर्वांचल के लोग दोपहर से ही हरकी पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों पर एकत्र हुए और विधि-विधान के साथ सूर्य देव को अर्घ्य दिया और सूर्य देव से परिवार के कल्याण समेत अन्य मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना की. मान्यता है कि जो भी सूर्य भगवान की आराधना सच्चे मन से करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वो धन-धान्य से पूर्ण हो जाता है.
नहाय खाय से शुरू होता है छठ महापर्व:छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय कहलाता है. दूसरा दिन खरना कहलाता है. तीसरे दिन संध्याकालीन अर्ध्य दिया जाता है और चौथे दिन प्रातःकालीन अर्ध्य के साथ लोक आस्था के महापर्व छठ का समापन होता है. प्रातःकालीन अर्ध्य के बाद छठ व्रती घर आकर छठ पूजन सामग्री का घर में पूजा कर पारण करती हैं.
सूर्य की आराधना से सभी गृह होते हैं अनुकूल :छठ पूजा का व्रत चतुर्थी को शुरू होकर सप्तमी को संपन्न होता है. इस दौरान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं. माना जाता है कि सूर्य भगवान की आराधना करने से सभी गृह अनुकूल हो जाते हैं. यह व्रत शादीशुदा महिलाओं के लिए ही होता है. इस व्रत को करने से नाग कन्या, सुकन्या और द्रोपदी को सुख की प्राप्ति हुई थी. साथ ही इस वृत को करने से संतान की भी प्राप्ति होती है.