पटना: बिहार में विकास केवल सीएम और पीएम के भाषणों में दिखाई देता है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि बिहार में पिछले 20 सालों से सत्ता संभाल रहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल का यह चुनाव अंतिम साल साबित होने वाला है. कैग से आई स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान रिपोर्ट और नीति आयोग के टिकाऊ विकास सूचकांक में बिहार का प्रदर्शन देश में सबसे खराब आंका गया था.
स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल:अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि ग्रामीण साक्षरता दर और भी खराब है जो कि 43% ही है. वहीं कैग की रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल ही चुकी है. जिसमें कहा गया कि कुल भेजी गई राशि का 31% रकम बिहार ने खर्च ही नहीं किया और साथ ही डब्ल्यूएचओ के तय मानकों के अनुसार यहां प्रति हजार की संख्या पर एक डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं.
विकास का दावा खोखला: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 26.95% जनता यहां गरीब है. 94.7% स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से घोषणा कर कहा था कि छात्र-छात्राओं के लिए अलग अलग शौचालय निर्माण कराएंगे और बाद में अपने भाषणों में उन्होंने खुद से सौ प्रतिशत इसकी पूर्ति का दावा भी कर दिया. लेकिन असल आंकड़े कुछ और ही हैं. स्वास्थ्य सेवाओं में 28 बड़े राज्यों में सबसे निचले पायदान पर हमारा देश बना हुआ है जो चार साल पहले 27 वें स्थान पर था.
व्यापारी की हो रही अनदेखी:अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार सरकार पर व्यापारियों के अनदेखी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि व्यापार करने की सुविधा में भी बिहार 26वें स्थान पर है और प्रति व्यक्ति आय में भी राष्ट्रीय औसत आय से बेहद कम है. कृषि पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है और न ही एमएसपी किसानों को सही से मिलता है. विकसित राज्यों में जहां 98% तक एफसीआई के द्वारा एमएसपी पर खाद्यान्न की खरीद की जाती है.
बढ़ते अपराध पर सरकार से सवाल:प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध बिहार राज्य में है और साइबर मामले में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. साइबर थाने के बढ़ने के बावजूद भी इन मामले पर कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है.