भोपाल। प्रदेश सरकार सुशासन के कितने भी दावे कर ले पर मध्य प्रदेश में कहीं न कहीं किसी न किसी तरीके से मानवाधिकारों का हनन हो रहा है. उदाहरण के तौर पर पूरे प्रदेश में जहां एक और सीएम राइस स्कूलों के निर्माण की बात की जा रही है तो वहीं मंडला जिले में 200 स्कूल ऐसे भी हैं जिसमें बारिश आने पर मध्यान भोजन बनाने के लिए शेड तक की व्यवस्था नहीं है. मानवाधिकार आयोग के कार्यवाह अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने इस मामले सहित 5 मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है.
गर्ल्स हाॅस्टल में घुसकर छात्रों का हंगामा
उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा विद्योत्तमा गर्ल्स हाॅस्टल में घुसकर छात्राओं को धमकाने का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर छात्र-छात्राओं के बीच विवाद हो गया था. गर्ल्स हाॅस्टल की छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रों ने वार्डन के सामने हाॅस्टल के अंदर घुसकर आग लगा देने, उन्हें उठा ले जाने और दुष्कर्म करने तक की धमकियां दी. छात्रों द्वारा परेशान किए जाने और शिकायत करने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसपर छात्राओं ने थाने जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई. मामले में संज्ञान लेकर मानवाधिकार आयोग ने उज्जैन कलेक्टर और एसपी से मामले की जांच कराकर तीन सप्ताह के अन्दर रिपोर्ट मांगी है.
मंडला में 200 स्कूलों में किचन शेड नहीं
मंडला जिले के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए कई तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं लेकिन इनके संचालन में लापरवाही बरती जा रही है. बच्चों के पोषण से जुड़े मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए 200 स्कूलों में व्यवस्थित किचन शेड तक नहीं है. ऐसे में मध्यान्ह भोजन तैयार करना रसोईयों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. कई स्कूलों में क्लास रूम तो कई स्कूल में खुले में ही भोजन बनाया जा रहा है. मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने मंडला कलेक्टर से मामले की जांच कराकर कार्रवाई के संबंध में तीन सप्ताह के अन्दर जवाब मांगा है.
जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भरा पानी
सीहोर जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में छत से बारिश का पानी टपकने का मामला सामने आया है. बारिश का पानी मरीजों के बेड पर भी टपक रहा है जिससे भर्ती मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार पानी टपकने से वार्ड में पानी इकट्ठा हो गया है. मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने सीहोर सीएमएचओ से मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए 15 दिन के अन्दर रिपोर्ट मांगी है.