आगरा पहुंचे सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि आगरा:क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर गुरुवार शाम अपनी पत्नी अंजलि तेंदुलकर के साथ आगरा पहुंचे. वीवीआईपी पूर्वी गेट से उन्होंने ताजमहल परिसर में प्रवेश किया. उनकी सुरक्षा को देखते हुए पहले से ही सीआईएसएफ और पुलिस की टीम तैनात की गई थी. फोर्ट कोर्ट में भीड़ ने सचिन तेंदुलकर और अंजलि तेंदुलकर को देखा, तो उनके साथी सेल्फी और फोटोज खिंचवाने को दौड़े.
इस पर सुरक्षा कर्मियों ने घेरा बनाकर प्रशंसकों की भीड़ से उन्हें आगे बढ़ाया. रॉयल गेट से जैसे ही सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर ने ताजमहल को देखा तो उसकी खूबसूरती में खो गए. सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी ने करीब 1 घंटे का समय ताजमहल में बिताया. इस दौरान उन्होंने खूब फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई. उन्होंने हाथ हिला करके प्रशंसकों का अभिवादन भी किया.
ताजमहल का दीदार करने पहुंचे क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि रॉयल गेट से पहले ही ताजमहल की झलक देखकर सचिन तेंदुलकर अंजलि तेंदुलकर की खुशी से आंखें चमक उठी. उन्होंने टूरिस्ट गाइड से रॉयल गेट के इतिहास के बारे में जानकारी ली. इस दौरान सुरक्षा कर्मियों के घेरा में सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर आगे बढ़े. दोनों ने रॉयल गेट पर खूब फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई. इसके बाद दोनों सेंट्रल टैंक पहुंचे.
डायना बेंच पर फोटो खिंचाई:सेंट्रल टैंक पर सचिन तेंदुलकर और अंजलि तेंदुलकर ने डायना सीट पर बैठ कर फोटोग्राफी कराई. डायना सीट का इतिहास जाना. इसके बाद सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी ताजमहल के मुख्य गुंबद पर पहुंचे. वहां उन्होंने टूरिस्ट गाइड से ताजमहल की पच्चीकारी, ताजमहल में लगे मार्बल, ताजमहल के इतिहास, शहंशाह शाहजंहा और मुमताज की प्रेम कहानी के बारे में जानकारी ली.
आगरा में सचिन तेंदुलकर को देखने के लिए उमड़ी भीड़ चमके पत्थर तो चौंके गए:ताजमहल के दीदार के दौरान जब सचिन तेंदुलकर ने ताजमहल पर लगे स्टोन चमकते दिखे और इसके बारे में टूरिस्ट गाइड से इसके बारे में पूछा. इस पर टूरिस्ट गाइड ने बताया कि, ताजमहल में कई ऐसे बेशकीमती मार्बल स्टोन लगे हैं. इन पर जब सूरज या चंद्रमा की किरणें पड़ती है, तो वह दमकते हैं. शाम और सुबह जब सूरज की किरणें ताजमहल पर तिरछे कोण से पड़ती हैं.
इससे ताजमहल में लगे बेशकीमती मार्बल स्टोन चमकते हैं. टूरिस्ट गाइड ने बताया कि, जैसे-जैसे सूरज ढलता है और सूरज की मूवमेंट के हिसाब से ताजमहल पर जहां भी तिरछी किरणें पड़ती है. वहां पर दमक या चमक दिखती है. ऐसा ही शरद पूर्णिमा के समय होता है. जब चांदनी रात में चंद्रमा की किरणें ताजमहल पर पड़ती हैं, तो उसमें लगे बेशकीमती पत्थर चमकते हैं और इसे तब चमकी कहते हैं.
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