रुद्रप्रयाग: दशकों पहले सौरगढ़ से धान्यू तक सिंचाई के लिए नहर बनाई गई थी. लेकिन हर साल बारिश के दौरान ये नहर कई जगह से टूट जाती है. सिंचाई विभाग द्वारा मामले का संज्ञान नहीं लेने पर ग्रामीणों ने नहर की मरम्मत का जिम्मा खुद ही उठाया और दो हफ्ते की कड़ी मेहन के बाद 4 किलोमीटर की रेंज में नहर का कायाकल्प कर दिया. उधर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अब जाकर नींद टूटी है. ठेकेदार को 1-2 दिनों में नहर की मरम्मत कर उसे चालू कराने की बात कही गई है.
दरअसल, नाकोट एवं धान्यू के ग्रामीण 7 किमी लंबी इसी नहर से अपने खेतों की सिंचाई करते हैं. हर साल बारिश के दौरान ये नहर कई जगहों से टूट जाती है, जिसकी मरम्मत सिंचाई विभाग हर बार करा देता है. मगर इस बार धान की रोपाई नजदीक आने पर भी नहर की मरम्मत नहीं कराई गई. ग्रामीण खुद ही नहर की मरम्मत कार्य के लिए जुट गए.
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वहीं, ग्रामीणों को श्रमदान दान करता देख अब जाकर सिंचाई विभाग की भी नींद खुली. दबाव में आकर नहर की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया है. नगर पंचायत सभासद दिनेश बेंजवाल ने बताया कि ये नहर सिंचाई विभाग के कार्यालय से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है. लेकिन विभागीय अधिकारियों को इस नहर का हाल नहीं दिखा.
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वहीं, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता धीरज डिमरी ने कहा कि साल 2013 की आपदा की वजह से क्षेत्र की कई नहरें क्षतिग्रस्त हैं. विभाग की ओर से इन नहरों का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया गया है. उन्होंने बताया कि हर साल नहर का रिवाइज इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाता रहा है, लेकिन अभी तक बजट का आवंटन नहीं हो पाया है. ऐसे में ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए हर साल विभाग किसी ना किसी तरह से नहर की मरम्मत का काम खुद से करवा कर काम चला रहा है.