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नैनीताल HC में संस्कृत महाविद्यालयों में अवकाश के मामले पर सुनवाई, सभी पक्षों से 18 अप्रैल तक मांगा जवाब - संस्कृत महाविद्यालयों में अवकाश

प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों में रविवार को अवकाश नहीं किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट के खंडपीठ ने सभी पक्षों को 18 अप्रैल 2023 तक जवाब पेश करने को कहा है.

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Published : Nov 22, 2022, 5:09 PM IST

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों में रविवार को अवकाश नहीं किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. इस मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने राज्य सरकार, निदेशक संस्कृत शिक्षा देहरादून, मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली, बद्रीश कीर्ति संस्कृत महाविद्यालय डिमरी सिमली कर्णप्रयाग व बद्रीश कीर्ति इंटर कॉलेज डिमरी सिमली कर्णप्रयाग से 18 अप्रैल 2023 तक जवाब पेश करने को कहा है.

इस मामले के अनुसार पर्वतीय शिल्पकार सभा के अध्यक्ष गिरीश लाल आर्या निवासी गोपेश्वर चमोली ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों में रविवार को छुट्टी नहीं दी जाती है. इन विद्यालयों व महाविद्यालयों में पंचाग को देखकर त्रिपता या अष्ठमी को अवकाश किया जाता है. वर्तमान प्रदेश में संस्कृत के 12 विद्यालय व महाविद्यालय हैं, जिनमें से तीन विद्यालयों में रविवार को अवकाश रहता है बाकी में त्रिपता या अष्टमी को अवकाश होता है.

पढ़ें- पिथौरागढ़ के धारचूला में भीषण अग्निकांड, 13 दुकानें जलकर राख

जनहित याचिका में कहा गया है कि जब सभी का रविवार को अवकाश रहता है, तो इन विद्यालयों व महाविद्यालयों में क्यों नहीं रहता? रविवार को अवकाश नहीं होने के कारण इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग नहीं कर पाते, क्योंकि सारी प्रतियोगी परीक्षाएं रविवार को ही होती है. ऐसे में अष्टमी सप्ताह में किसी भी दिन आ सकती है या दो सप्ताह में कभी भी, यह पंचाग पर निर्भर करता है. इसलिए प्रदेश के सभी संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों में रविवार को ही अवकाश घोषित किया जाय. यह संविधान के अनुछेद 14 का भी उल्लंघन है. ऐसे में इस मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने सभी पक्षों से 18 अप्रैल तक अपना जवाब पेश करने को कहा है.

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों में रविवार को अवकाश नहीं किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. इस मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने राज्य सरकार, निदेशक संस्कृत शिक्षा देहरादून, मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली, बद्रीश कीर्ति संस्कृत महाविद्यालय डिमरी सिमली कर्णप्रयाग व बद्रीश कीर्ति इंटर कॉलेज डिमरी सिमली कर्णप्रयाग से 18 अप्रैल 2023 तक जवाब पेश करने को कहा है.

इस मामले के अनुसार पर्वतीय शिल्पकार सभा के अध्यक्ष गिरीश लाल आर्या निवासी गोपेश्वर चमोली ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों में रविवार को छुट्टी नहीं दी जाती है. इन विद्यालयों व महाविद्यालयों में पंचाग को देखकर त्रिपता या अष्ठमी को अवकाश किया जाता है. वर्तमान प्रदेश में संस्कृत के 12 विद्यालय व महाविद्यालय हैं, जिनमें से तीन विद्यालयों में रविवार को अवकाश रहता है बाकी में त्रिपता या अष्टमी को अवकाश होता है.

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जनहित याचिका में कहा गया है कि जब सभी का रविवार को अवकाश रहता है, तो इन विद्यालयों व महाविद्यालयों में क्यों नहीं रहता? रविवार को अवकाश नहीं होने के कारण इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग नहीं कर पाते, क्योंकि सारी प्रतियोगी परीक्षाएं रविवार को ही होती है. ऐसे में अष्टमी सप्ताह में किसी भी दिन आ सकती है या दो सप्ताह में कभी भी, यह पंचाग पर निर्भर करता है. इसलिए प्रदेश के सभी संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों में रविवार को ही अवकाश घोषित किया जाय. यह संविधान के अनुछेद 14 का भी उल्लंघन है. ऐसे में इस मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने सभी पक्षों से 18 अप्रैल तक अपना जवाब पेश करने को कहा है.

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