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दरिंदों से आबरू बचाने के लिए बेटियां कर रहीं ये काम, पास भी नहीं आएंगे 'राक्षस' - हरिद्वार समाचार

आधी आबादी  का नेतृत्व करने वाली बच्चियां कराटे व मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही हैं, ताकि वे छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले दरिंदों से अपनी रक्षा कर सकें.

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Published : Jul 21, 2019, 3:11 PM IST

ऋषिकेशः देश में बलात्कार और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई कठोर कानून बनाए गए हैं. फिर भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं. यही कारण है कि अब परिजन अपनी बेटियों को कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देकर आत्मरक्षा के लिए मजबूत बना रहे हैं.

बेटियां कराटे व मार्शल आर्ट की शिक्षा ले रही हैं

ऋषिकेश में इन दिनों अधिक संख्या में बालिकाएं कराटे व मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही हैं, ताकि वे छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले दरिंदों से अपनी रक्षा कर सकें. परिजनों की मानें तो आज के समय में अपनी आत्मरक्षा करने के लिए कराटे जैसी विधाएं काफी मददगार साबित हो सकती हैं. यही कारण है कि वह अपनी बेटियों को कराटे की ट्रेनिंग दिला रहे हैं. वहीं कराटे सीखने वाली छात्रा का कहना है कि कराटे की ट्रेनिंग लेने के बाद लड़कियां छेड़छाड़ करने वालों का मुंहतोड़ जवाब दे सकती हैं.
वहीं कराटे टीचर राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि वह कराटे के माध्यम से सभी छात्र- छात्राओं को आत्मरक्षा करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इस प्रशिक्षण को देने के बाद लड़कियां हर मोर्चे पर अपनी सुरक्षा के लिए किसी का भी मुकाबला करने को तैयार हो जाएंगी और खुद को सुरक्षित महसुस कर सकेंगी.

ऋषिकेशः देश में बलात्कार और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई कठोर कानून बनाए गए हैं. फिर भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं. यही कारण है कि अब परिजन अपनी बेटियों को कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देकर आत्मरक्षा के लिए मजबूत बना रहे हैं.

बेटियां कराटे व मार्शल आर्ट की शिक्षा ले रही हैं

ऋषिकेश में इन दिनों अधिक संख्या में बालिकाएं कराटे व मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही हैं, ताकि वे छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले दरिंदों से अपनी रक्षा कर सकें. परिजनों की मानें तो आज के समय में अपनी आत्मरक्षा करने के लिए कराटे जैसी विधाएं काफी मददगार साबित हो सकती हैं. यही कारण है कि वह अपनी बेटियों को कराटे की ट्रेनिंग दिला रहे हैं. वहीं कराटे सीखने वाली छात्रा का कहना है कि कराटे की ट्रेनिंग लेने के बाद लड़कियां छेड़छाड़ करने वालों का मुंहतोड़ जवाब दे सकती हैं.
वहीं कराटे टीचर राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि वह कराटे के माध्यम से सभी छात्र- छात्राओं को आत्मरक्षा करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इस प्रशिक्षण को देने के बाद लड़कियां हर मोर्चे पर अपनी सुरक्षा के लिए किसी का भी मुकाबला करने को तैयार हो जाएंगी और खुद को सुरक्षित महसुस कर सकेंगी.

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ऋषिकेश-- देश में बलात्कार और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई कठोर कानून बनाए गए हैं इसके बावजूद भी छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं यही कारण है कि अब परिजन अपनी बेटियों को कराटे और मार्शल आर्ट जैसी विधाएं सिखा कर आत्मरक्षा के लिए मजबूत बना रहे हैं।


Body:वी/ओ-- ऋषिकेश में इन दिनों बड़ी संख्या में बालिकाएं कराटे व मार्शल आर्ट की शिक्षा ले रहे हैं ताकि वे छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले दरिंदों से अपनी रक्षा कर सकें, परिजनों की मानें तो आज के समय में अपनी आत्मरक्षा करने के लिए कराटे जैसी विधाएं काफी मददगार सिद्ध हो सकती हैं यही कारण है कि वह अपनी बेटियों को कराटे की शिक्षा दिलवा रही हैं वही कराटे सीखने वाली छात्रा का कहना था कि कराटे की ट्रेनिंग लेने के बाद लड़कियां छेड़छाड़ करने वालों का विरोध करके उनको मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगी।


Conclusion:वी/ओ-- कराटे की ट्रेनिंग दे रहे कराटे टीचर राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि वह कराटे के माध्यम से सभी छात्र छात्राओं को आत्मरक्षा करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं इस प्रशिक्षण को लेने के बाद लड़कियां हर मोर्चे पर अपनी सुरक्षा के लिए किसी का भी मुकाबला करने को तैयार हो जाएंगी और खुद को सुरक्षित कर सकेंगी।

बाईट--नलिनी(छात्रा)
बाईट--रश्मि(परिजन)
बाईट--राजेन्द्र गुप्ता(कराटे टीचर)
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