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डेंगू से जंग के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क बनी, बुखार आते ही कराएं इलाज

यूपी के जिलों में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा वायरल फीवर के मरीजों की तादाद बढ़ रही है. इससे बचाव के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क (Fever help desk in varanasi ) बनाई गई है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों से बुखार आते ही हेल्प डेस्क की मदद लेने की अपील की है.

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Published : Nov 8, 2022, 5:29 PM IST

वाराणसी : बदलते मौसम में बुखार के साथ डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वाराणसी के हेल्थ डिपार्टमेंट का दावा है कि वाराणसी जिले में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है. डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम के बाद ठंड बढ़ते ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि मच्छर जनित बीमारियां अपना पैर पसारने लगती हैं, जिससे सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि वायरल फीवर और डेंगू से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर फीवर हेल्प डेस्क (Fever help desk in varanasi ) की सुविधा शुरू की है. जहां यदि किसी को भी बुखार आता है तो वह हेल्पडेस्क पर जाकर अपनी जांच सकता है.

डेंगू से जंग के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क बनी
डेंगू से जंग के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क बनी
फीवर हेल्प डेस्क करेंगे बुखार से लोगों की रक्षा : मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों पर फीवर हेल्प डेस्क को सक्रिय कर दिया गया है. लोग बुखार आने पर घर के नजदीक ही अपनी जांच कराकर उपचार करा सकते हैं. इसके लिए जिला क्षय रोग केंद्र के एसटीएस, टीबी एचबी और कुष्ठ रोग के एमएमए और एमएमएस को क्षेत्र में डेंगू की रोकथाम के लिए तैनात किया गया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सकों और समस्त स्टाफ को निर्देशित किया कि मरीजों के उपचार और जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.पिछले साल डेंगू के थे 352 मरीज : जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष वाराणसी जिले में डेंगू के 352 मरीज पाये गए थे. इस वर्ष जिले में अब तक डेंगू के 254 मरीज (dengue cases in varanasi) पाए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है, जिसमें तेज बदन दर्द, शरीर पर चकत्ते और लाल दाने हो सकते हैं. खून में प्लेटलेट्स की संख्या में तेजी से गिरावट होती है. बुखार न होने के 48 घंटे बाद से प्लेटलेट्स बढ़ने की संभावना बढ़ जाती हैं और मरीज स्वस्थ होने लगता है. डेंगू बुखार में किसी एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती है. डेंगू मरीज को शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. विटामिन सी का सेवन अधिक करना चाहिए. लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.इन बातों का विशेष ध्यान रखें
  • घरों के आसपास जल जमाव न होने दें
  • छत पर एवं घर के अंदर अनुपयोगी डिब्बे, पात्र जिसमें जल एकत्र हो सकता हो उसे खाली कर दें
  • फ्रिज के पीछे प्लेट में पानी एकत्र न होने दें
  • गमलों, नारियल के खोल, या अनुपयोगी टायर, टंकी को जरूर से साफ करवाते रहें, एवं उनमें पानी एकत्र न होने दें
  • मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें
  • शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें

पढ़ें : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहुंचे वाराणसी, बोले- गंगा में जल्द बनेगा सिक्स लेन हाईवे पुल

वाराणसी : बदलते मौसम में बुखार के साथ डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वाराणसी के हेल्थ डिपार्टमेंट का दावा है कि वाराणसी जिले में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है. डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम के बाद ठंड बढ़ते ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि मच्छर जनित बीमारियां अपना पैर पसारने लगती हैं, जिससे सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि वायरल फीवर और डेंगू से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर फीवर हेल्प डेस्क (Fever help desk in varanasi ) की सुविधा शुरू की है. जहां यदि किसी को भी बुखार आता है तो वह हेल्पडेस्क पर जाकर अपनी जांच सकता है.

डेंगू से जंग के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क बनी
डेंगू से जंग के लिए वाराणसी में फीवर हेल्प डेस्क बनी
फीवर हेल्प डेस्क करेंगे बुखार से लोगों की रक्षा : मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों पर फीवर हेल्प डेस्क को सक्रिय कर दिया गया है. लोग बुखार आने पर घर के नजदीक ही अपनी जांच कराकर उपचार करा सकते हैं. इसके लिए जिला क्षय रोग केंद्र के एसटीएस, टीबी एचबी और कुष्ठ रोग के एमएमए और एमएमएस को क्षेत्र में डेंगू की रोकथाम के लिए तैनात किया गया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सकों और समस्त स्टाफ को निर्देशित किया कि मरीजों के उपचार और जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.पिछले साल डेंगू के थे 352 मरीज : जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष वाराणसी जिले में डेंगू के 352 मरीज पाये गए थे. इस वर्ष जिले में अब तक डेंगू के 254 मरीज (dengue cases in varanasi) पाए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है, जिसमें तेज बदन दर्द, शरीर पर चकत्ते और लाल दाने हो सकते हैं. खून में प्लेटलेट्स की संख्या में तेजी से गिरावट होती है. बुखार न होने के 48 घंटे बाद से प्लेटलेट्स बढ़ने की संभावना बढ़ जाती हैं और मरीज स्वस्थ होने लगता है. डेंगू बुखार में किसी एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती है. डेंगू मरीज को शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. विटामिन सी का सेवन अधिक करना चाहिए. लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.इन बातों का विशेष ध्यान रखें
  • घरों के आसपास जल जमाव न होने दें
  • छत पर एवं घर के अंदर अनुपयोगी डिब्बे, पात्र जिसमें जल एकत्र हो सकता हो उसे खाली कर दें
  • फ्रिज के पीछे प्लेट में पानी एकत्र न होने दें
  • गमलों, नारियल के खोल, या अनुपयोगी टायर, टंकी को जरूर से साफ करवाते रहें, एवं उनमें पानी एकत्र न होने दें
  • मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें
  • शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें

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