लखनऊः बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस को लेकर तकरार के बाद अब टेंडर को लेकर छात्र और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने- सामने हैं. आरोप लग रहे हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को किनारे करके मैन पॉवर सप्लाई का काम एक निजी कंपनी को सौंप दिया. विश्वविद्यालय के छात्र धनजी यादव ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रपति से लेकर एमएचआरडी तक से की है.
आरोप है कि बीबीएयू में टेंडर नियमों को ताक पर रख कर एक आईटी कंपनी को मैनपॉवर सप्लाई की जिम्मेदारी दे दी गई. शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय के 300 संविदा कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं दिया गया है. उसके बाद अब इस नए फैसले ने सभी कर्मचारियों की चिंता और बढ़ा दी हैं. इस आईटी कंपनी ने पिछली टेंडर प्रक्रिया में भाग तक नहीं लिया था और न ही वो टेंडर की आवश्यक अहर्ता जैसे लेबर लाइसेंस को भी पूर्ण करती है.
विश्वविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ रचना गंगवार ने बताया कि बिल प्रक्रिया में हैं जिनका भुगतान कंपनी को किया जाएगा. विश्वविद्यालय प्रयासरत है कि सभी कर्मचारियों को उनके कार्य का भुगतान हो. विश्वविद्यालय सभी आरोपों का खण्डन करता है. GFR नियमों के आधार पर ही नया वर्क ऑर्डर दिया गया है.
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लगातार उठ रहे विवाद
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय बीते दिनों से लगातार विवादों में है. हाल ही में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को लेकर जमकर विवाद हुआ था. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस बार स्थापना दिवस की तारीख में परिवर्तन किया गया है. बीते 25 सालों से बीबीएयू का स्थापना दिवस समारोह 10 जनवरी को मनाया जाता था लेकिन इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से स्थापना दिवस 14 अप्रैल को मनाए जाने की घोषणा की गई. विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि 14 जनवरी 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विश्वविद्यालय की नींव रखी थी. उसके हिसाब से स्थापना दिवस 14 अप्रैल को मनाया जाना चाहिए. वहीं, छात्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी विश्वविद्यालय के इतिहास के साथ जबरन छेड़छाड़ कर रहे हैं.
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