लखनऊ: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोरोना वायरस के लिए 'बहरूपिया' शब्द इस्तेमाल करने पर हमला बोला है. कांग्रेस नेता ने पीएम को याद दिलाते हुए कहा है कि आपकी ही पार्टी के एक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कोरोना को आम इंसान की तरह ही एक प्राणी बता रहे थे. उसे भी जीने का अधिकार दे रहे थे. प्राणी जिस तरह रूप बदलता है उसी तरह कोरोना वायरस भी रूप बदल सकता है. इस तरह के आप के नेता बयान देते हैं और आप भी उसी तरह के बयान दे रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी है कि इस सोच से बाहर निकलिए वैज्ञानिक युग में आइए.
'कोरोना को प्राणी मानते हैं भाजपा नेता'
वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज अपने उद्बोधन में वायरस के लिए बहुरूपिया शब्द का इस्तेमाल किया है. मुझे अनायास याद आ गया भारत के एक राज्य उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री का ज्ञानवर्धक बयान. उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस नहीं प्राणी है. वह बहरूपिया की तरह रूप बदलता रहता है. वह प्राणी है और हम भी प्राणी हैं तो उसको भी जीने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव का ज्ञान भी हम सुन चुके हैं. आपके कैबिनेट मंत्री एक से एक ज्ञान देते रहते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी पाषाणकालीन ज्ञान से बाहर आइए. वैज्ञानिक युग में आइए और इस वायरस को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक सोच के साथ जो दुनिया के महान वैज्ञानिक कह रहे हैं, उसका पालन करिए. अगर आप इन्हीं लोगों से घिरे रहते हैं या इन लोगों के विचार आप पर आगे आते रहते हैं, तो उससे आपको बाहर निकलना होगा. वह तो वायरस को प्राणी बता रहे हैं. उसे जीने का अधिकार दे रहे हैं.
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'अज्ञानता भरे कुशासन ने सब किया बर्बाद'
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने पीएम मोदी पर कटाक्ष किया कि जो आपके उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जिन्होंने चार साल उत्तराखंड में राज किया है. मुझे यह बता दें कि अगर जीने का अधिकार वायरस को है, तो मरने का सम्मान भी उसे दे दीजिए. जिस तरह गंगा में आपके भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश में मरने के बाद प्राणियों का अपमान हो रहा है उसपर शर्म आती है. सिर झुक जा रहा है. पढ़िए दुनिया के अखबार क्या कह रहे हैं? क्या कहा जा रहा है दुनिया में हमारे बारे में? कहां से कहां पहुंचा दिया है भारत को भारतीय जनता पार्टी के अज्ञानता भरे कुशासन ने. चाहे आर्थिक क्षेत्र हो, वैज्ञानिक क्षेत्र या फिर कोरोना से संघर्ष का क्षेत्र हो.