कानपुर: केडीए के भ्रष्टाचार की परत दर परत अब खुलने लगी है, जिसकी बानगी इस शासनादेश के बाद केडीए कर्मचारियों पर होने वाली एफआईआर से साफ हो रही है. आरोपी कर्मचारियों में दो सेवानिवृत्त हो चुके, जबकि एक की मौत हो चुकी है. चार वर्तमान में केडीए में कार्यरत हैं.
फर्जी हस्ताक्षर कर कराई रजिस्ट्री
कानपुर विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट बाबुओं ने कानपुर के किदवई नगर और जूही इलाके में चार प्लॉट्स अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी फर्जी रजिस्ट्री तक करा दी थी. मामले में बीजेपी विधायक अशोक चंदेल की शिकायत पर शासन ने इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए.
जांच में केडीए के कर्मचारी पाये गये दोषी
केडीए सचिव स्तर पर 2018 में शुरू हुई जांच को ज्वाइंट सेक्रेटरी केके सिंह ने जांच की तो केडीए कर्मचारियों को दोषी पाया और सचिव को जांच रिपोर्ट सौंपी. दोषी कर्मचारियों में तीन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इसमें एक की मौत हो चुकी है. महेश गुप्ता प्रथम श्रेणी लिपिक और कमलेश कुमार साहू प्रधान लिपिक ये दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं. लिपिक श्याम मोहन की मौत हो चुकी है. वहीं अश्वनी अवस्थी (लेखाकार) , कंचन कुमार गुप्ता प्रथम श्रेणी लिपिक, प्रेम सिंह राठौर द्वितीय श्रेणी लिपिक ये वर्तमान में केडीए में कार्यरत हैं इन पर भी एफआईआर होगी.