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अलीगढ़: स्वच्छता के लिए बना बायो टॉयलेट हुआ बदहाल - Dirt in the bio-toilet in aligarh

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्वच्छता के लिए बनाए गए बायो टॉयलेट बदहाल हो चुके हैं. बायो टॉयलेट के निर्माण के इसका बाद रखरखाव करने वाला कोई नहीं है.

बदहाली का रोना रोते बायो टॉयलेट.
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Published : Jul 6, 2019, 1:44 PM IST

अलीगढ़: अलीगढ़ में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाया जा रहा है. प्रशासन आम जनता को सुलभ और अच्छे टॉयलेट देकर वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए पानी की तरह रुपया बहा रहा है, लेकिन टूटे कमोड, उखड़ा फर्श, बदबू और गंदगी ये है अलीगढ़ के बायो टॉयलेट की हकीकत. शहर के 9 स्थानों पर बनाए गए बायो टॉयलेट अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं.

बदहाली का रोना रोते बायो टॉयलेट.

टॉयलेट की स्थिति बदहाल

  • टूटे कमोड, उखड़ा फर्श, बदबू और गंदगी ये है अलीगढ़ के बायो टॉयलेट की हकीकत.
  • कलेक्ट्रेट के ठीक सामने और क्वारसी फार्म हाउस के बायो टॉयलेट इस कदर गंदे और बदबूदार हैं कि इनके अंदर जाना मुश्किल है.
  • बायो टॉयलेट के निर्माण के इसका बाद रखरखाव करने वाला कोई नहीं है.
  • कई खस्ताहाल टॉयलेट पर ताला लग गया है.

अलीगढ़: अलीगढ़ में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाया जा रहा है. प्रशासन आम जनता को सुलभ और अच्छे टॉयलेट देकर वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए पानी की तरह रुपया बहा रहा है, लेकिन टूटे कमोड, उखड़ा फर्श, बदबू और गंदगी ये है अलीगढ़ के बायो टॉयलेट की हकीकत. शहर के 9 स्थानों पर बनाए गए बायो टॉयलेट अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं.

बदहाली का रोना रोते बायो टॉयलेट.

टॉयलेट की स्थिति बदहाल

  • टूटे कमोड, उखड़ा फर्श, बदबू और गंदगी ये है अलीगढ़ के बायो टॉयलेट की हकीकत.
  • कलेक्ट्रेट के ठीक सामने और क्वारसी फार्म हाउस के बायो टॉयलेट इस कदर गंदे और बदबूदार हैं कि इनके अंदर जाना मुश्किल है.
  • बायो टॉयलेट के निर्माण के इसका बाद रखरखाव करने वाला कोई नहीं है.
  • कई खस्ताहाल टॉयलेट पर ताला लग गया है.
Intro:अलीगढ़ : अलीगढ़ में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाया जा रहा है . शासन आम जनता को सुलभ और अच्छे टॉयलेट देख कर वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए पानी की तरह रुपया बहा रहा है. लेकिन अलीगढ़ शहर में 9 स्थानों पर बनाए गए बायो टॉयलेट किसी काम के नहीं है . नाम तो इनका बायो टॉयलेट रखा गया. लेकिन आप प्रत्यक्ष देख सकते हैं की हकीकत क्या है.









Body:कलेक्ट्रेट के ठीक सामने और क्वारसी फार्म हाउस के बायो टॉयलेट इस कदर गंदे और बदबूदार हैं कि अंदर घुस नहीं सकते. जिला प्रशासन ने बड़े अरमानों से जनता के लिए टॉयलेट बनाए थे . स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए. शहर को ओडीएफ मुक्त कर दिया गया . लेकिन हकीकत कुछ और ही है . टूटे कमोड, उखड़ा फर्श और बदबू व गंदगी ऐसी की एक पल अंदर नहीं रुक सकते. शहर में बने सभी बायो टॉयलेट की यही कहानी है.


Conclusion:बायो टॉयलेट के पास से नाक पर कपड़ा रखकर ही गुजर सकते हैं . इस बायोटॉयलेट के निर्माण के बाद केयर करने वाला कोई नहीं है . कई खस्ताहाल टॉयलेट पर ताला लग गया है . हालांकि इस बार टॉयलेट के रखरखाव की जिम्मेदारी मिडास कंपनी की है. लेकिन जिला प्रशासन व नगर निगम ने आंख बंद कर रखी है . समाजसेवी विमल खेमानी ने कहा कि बायो टॉयलेट के रखरखाव का कोई इंतजाम नहीं है. टॉयलेट गंदगी और दुर्गंध से भरा पड़ा है. वहीं जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने मामला नगर निगम पर डाल दिया और केवल औपचारिकता पूरी करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया.

बाइट : विमल खेमानी, समाजसेवी
बाइट : चंद्र भूषण सिंह जिलाअधिकारी, अलीगढ़

आलोक सिंह, अलीगढ़
98378 30535
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