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जब पीतल की चमक हुई फीकी तो मिक्स मेटल बना कारोबारियों का सहारा - मुरादाबाद के पीतल

सोने की चमक रखने वाले मुरादाबाद के पीतल उत्पाद पूरी दुनिया में अपना जलवा बिखेरते हैं. कारीगरों के हाथों के हुनर से पीतल के उत्पादों पर उभरी दस्तकारी लोगों का कई दशकों से मन मोहती रही हैं, लेकिन बदलते दौर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बाद पिछले कुछ समय में पीतल उद्योग ने भी अपना चेहरा बदला है. सालों तक पीतल कारोबार से शहर का नाम रोशन करने वाले लाखों कारीगरों ने अब दुनिया में खुद को साबित करने के लिए मिक्स मेटल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

मुरादाबाद
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Published : Feb 27, 2019, 8:45 PM IST

मुरादाबाद : मुगल काल से मुरादाबाद शहर को पीतल उत्पादों के लिए जाना जाता रहा है. दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां इस शहर के पीतल ने अपनी चमक न बिखेरी हो. पीतल की दुनिया में सालों एकछत्र राज करने के बाद अब पीतल के पारम्परिक उद्योग का चेहरा बीते कुछ सालों में बदल गया है.

पीतल के कच्चे माल की महंगाई, विदेशों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तकनीक का उद्योगमें कम इस्तेमाल और नए प्रयोग करने में देरी के चलते विदेशों में पीतल उत्पादों की मांग कम हुई है. कभी सालाना 6 से 7 हजार करोड़ रुपये का विदेशी व्यापार करने वाले मुरादाबाद में अब पीतल का काम पचास फीसदी से भी कम हो गया है.

देखें रिपोर्ट.

मुरादाबाद के पीतल कारोबार से जुड़े लोग पहले कच्चा माल खरीदकर बड़ी-बड़ी भट्टियों में पीतल की सिल्लियां तैयार करते हैं. इन सिल्लियों को कारोबारी खरीदकर इनको छोटे कारीगरों को देते हैं जो सिल्लियों को भट्टियों में गलाकर उत्पाद के सांचे में ढाल देते हैं. इसके बाद उत्पाद को फिनिशिंग, कलर, डिजाइन करने के लिए अलग-अलग लोगों को सौंपा जाता है. एक्सपोर्टर इन्हीं कारोबारियों से अपने ऑर्डर को तैयार कराते हैं और विदेशों में भेजते हैं. हस्तशिल्प का यह उद्योग मुरादाबाद की गलियों तक फैला हुआ है, लेकिन अब कोयले और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और उत्पाद की कम कीमतों के चलते कई कारीगर इस उद्योग से पलायन कर रहें हैं.

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मुरादाबाद के पीतल उद्योग में आज साठ से सत्तर फीसदी अन्य धातुओं का प्रयोग किया जा रहा है. मिक्स मेटल के जरिये जहां उत्पाद को आकर्षक बनाया जा रहा है, वहीं इसको बनाने में कम मेहनत भी लगती है. सस्ता और टिकाऊ होने के चलते मिक्स मेटल के उत्पाद दुनिया के बाजार में चाइना का भी मुकाबला कर रहे हैं और कारोबारियों को मुनाफा दे रहे हैं. पीतल के उत्पादों को लेकर अब विदेशों में भी आकर्षण कम हुआ है, जिसके बाद मिक्स मेटल अब कारोबारियों के लिए संजीवनी बन रहा है.

मुरादाबाद से निर्यात होने वाले उत्पादों में मिक्स मेटल छाया हुआ है. पीतल कारोबार से जुड़े कारोबारी और कारीगर भी अब मिक्स मेटल को लेकर संजीदा हो रहे हैं. बदलते दौर के लिए आवश्यक है कि दुनिया की पसंद के हिसाब से अपने उद्योगोंको अपडेट किया जाय और पीतल नगरी ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

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मुरादाबाद : मुगल काल से मुरादाबाद शहर को पीतल उत्पादों के लिए जाना जाता रहा है. दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां इस शहर के पीतल ने अपनी चमक न बिखेरी हो. पीतल की दुनिया में सालों एकछत्र राज करने के बाद अब पीतल के पारम्परिक उद्योग का चेहरा बीते कुछ सालों में बदल गया है.

पीतल के कच्चे माल की महंगाई, विदेशों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तकनीक का उद्योगमें कम इस्तेमाल और नए प्रयोग करने में देरी के चलते विदेशों में पीतल उत्पादों की मांग कम हुई है. कभी सालाना 6 से 7 हजार करोड़ रुपये का विदेशी व्यापार करने वाले मुरादाबाद में अब पीतल का काम पचास फीसदी से भी कम हो गया है.

देखें रिपोर्ट.

मुरादाबाद के पीतल कारोबार से जुड़े लोग पहले कच्चा माल खरीदकर बड़ी-बड़ी भट्टियों में पीतल की सिल्लियां तैयार करते हैं. इन सिल्लियों को कारोबारी खरीदकर इनको छोटे कारीगरों को देते हैं जो सिल्लियों को भट्टियों में गलाकर उत्पाद के सांचे में ढाल देते हैं. इसके बाद उत्पाद को फिनिशिंग, कलर, डिजाइन करने के लिए अलग-अलग लोगों को सौंपा जाता है. एक्सपोर्टर इन्हीं कारोबारियों से अपने ऑर्डर को तैयार कराते हैं और विदेशों में भेजते हैं. हस्तशिल्प का यह उद्योग मुरादाबाद की गलियों तक फैला हुआ है, लेकिन अब कोयले और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और उत्पाद की कम कीमतों के चलते कई कारीगर इस उद्योग से पलायन कर रहें हैं.

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मुरादाबाद के पीतल उद्योग में आज साठ से सत्तर फीसदी अन्य धातुओं का प्रयोग किया जा रहा है. मिक्स मेटल के जरिये जहां उत्पाद को आकर्षक बनाया जा रहा है, वहीं इसको बनाने में कम मेहनत भी लगती है. सस्ता और टिकाऊ होने के चलते मिक्स मेटल के उत्पाद दुनिया के बाजार में चाइना का भी मुकाबला कर रहे हैं और कारोबारियों को मुनाफा दे रहे हैं. पीतल के उत्पादों को लेकर अब विदेशों में भी आकर्षण कम हुआ है, जिसके बाद मिक्स मेटल अब कारोबारियों के लिए संजीवनी बन रहा है.

मुरादाबाद से निर्यात होने वाले उत्पादों में मिक्स मेटल छाया हुआ है. पीतल कारोबार से जुड़े कारोबारी और कारीगर भी अब मिक्स मेटल को लेकर संजीदा हो रहे हैं. बदलते दौर के लिए आवश्यक है कि दुनिया की पसंद के हिसाब से अपने उद्योगोंको अपडेट किया जाय और पीतल नगरी ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

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Intro:एंकर: मुरादाबाद: सोने की चमक रखने वाले मुरादाबाद के पीतल उत्पाद पूरी दुनिया में अपना जलवा बिखेरते है. कारीगरों के हाथों के हुनर से पीतल के उत्पादों पर उभरी दस्तकारी लोगों का सालों से मन मोहती रहती है. बदलते दौर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बाद पिछले कुछ समय में पीतल उधोग ने भी अपना चेहरा बदला है. वर्षो तक पीतल कारोबार से शहर का नाम रोशन करने वाले लाखों कारीगरों ने अब दुनिया में खुद को साबित करने के लिए मिक्स मैटल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. सालाना 6 से 7 हजार करोड़ रुपये का विदेशी व्यापार करने वाले मुरादाबाद में अब पीतल का काम पचास फीसदी से भी कम हो गया है. विदेशों में पीतल के साथ साथ लोहे,एल्युमिनियम,कांच और अन्य धातुओं को पसंद किया जा रहा है जिसके बाद पीतल के कारखाने अब इन्ही धातुओं को उत्पादों में ढाल रहीं है.



Body:वीओ वन: मुगल काल से मुरादाबाद शहर को पीतल उत्पादों के लिए जाना जाता रहा है. दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां इस शहर का पीतल अपनी चमक नहीं बिखेरता हो. पीतल की दुनिया में सालों एकछत्र राज करने के बाद अब पीतल के पारम्परिक उधोग का चेहरा बीते कुछ सालों में बदला है. पीतल के कच्चे माल की महंगाई, विदेशों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तकनीक का उधोग में कम इस्तेमाल और नए प्रयोग करने में देरी के चलते विदेशों में पीतल उत्पादों की मांग कम हुई है. कभी सालाना 2 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करने वाले मुरादाबाद में आज निर्यात छह से सात हजार करोड़ रुपये के बीच में है. पीतल कारोबार में एक उत्पाद को तैयार करने के लिए कई चरण पूरे करने होते है और कच्चे माल को जलाने से लेकर उसको भट्टियों में गलाने, डिजाइन बनाने,सांचे में ढालने,पॉलिशिंग,फिनिशिंग,और पैकिंग करने में तीस से चालीस चरण होते है जो इन उत्पादों को महंगा बना देते है.
बाइट: आजम अंसारी- कारखानेदार
वीओ टू: मुरादाबाद के पीतल कारोबार से जुड़े लोग पहले कच्चा माल खरीदकर बड़ी बड़ी भट्टियों में पीतल की सिल्लियां तैयार करते है. इन सिल्लियों को कारोबारी खरीद कर इनको छोटे कारीगरों को देते है जो सिल्लियों को भट्टियों में गला कर उत्पाद के सांचे में ढाल देते है. इसके बाद उत्पाद को फिनिशिंग,कलर,डिजाइन करने के लिए अलग अलग लोगों को सौंपा जाता है. एक्सपोर्टर इन्ही कारोबारियों से अपने ऑर्डर को तैयार करते है और विदेशों में भेजते है. हस्तशिल्प का यह उधोग मुरादाबाद की गलियों तक फैला हुआ है लेकिन अब कोयले और कच्चे माल की कीमतों में बढोत्तरी और उत्पाद की कम कीमतों के चलते कई कारीगर इस उधोग से पलायन कर रहें है.
बाइट: मोहम्मद शफी: कारीगर
वीओ तीन: मुरादाबाद के पीतल उधोग में आज साठ से सत्तर फीसदी अन्य धातुओं का प्रयोग किया जा रहा है. मिक्स मैटल के जरिये जहां उत्पाद को आकर्षक बनाया जा रहा है वहीं इसको बनाने में कम मेहनत भी लगती है. सस्ता और टिकाऊ होने के चलते मिक्स मैटल के उत्पाद दुनिया के बाजार में चाइना का भी मुकाबला कर रहें है और कारोबारियों को मुनाफा दे रहें है. पीतल के उत्पादों को लेकर अब विदेशों में भी आकर्षण कम हुआ है जिसके बाद मिक्स मैटल अब कारोबारियों के लिए संजीवनी बन रहा है.
बाइट: देशराज गौतम: उप आयुक्त उधोग मुरादाबाद मण्डल


Conclusion:वीओ चार: मुरादाबाद से निर्यात होने वाले उत्पादों में मिक्स मैटल छाया हुआ है. पीतल कारोबार से जुड़े कारोबारी ओर कारीगर भी अब मिक्स मैटल को लेकर संजीदा हो रहें है. बदलते दौर के लिए आवश्यक है कि दुनिया की पसंद के हिसाब से अपने उधोगों को अपडेट किया जाय और पीतल नगरी ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए है.
भुवन चन्द्र
ईटीवी भारत
मुरादाबाद
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