जयपुर. राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले 7 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने मंगलवार से सत्याग्रह शुरू कर दिया. समिति सदस्यों ने मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं करने पर आक्रोश जताया और कहा कि अगर सरकार नहीं मानती है तो 25 अक्टूबर से क्रमिक अनशन कर आंदोलन को तेज किया जाएगा.
राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी संघर्ष समिति पिछले 3 महीने से मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार के खिलाफ लामबंद है. इस दौरान संघर्ष समिति के बैनर तले सरकार को कई बार ज्ञापन दिए गए. संघर्ष समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्य सचिव बातचीत के लिए नहीं बुला रहे हैं.
संघर्ष समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि 9 सितंबर को जयपुर में मंत्रालयिक कर्मचारियों ने रैली निकाली थी. रैली के बाद मुख्य सचिव से वार्ता करवाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन एक महीना गुजरने के बावजूद भी अभी तक मुख्य सचिव ने बातचीत के लिए नहीं बुलाया. इसे लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है.
राठौड़ ने कहा कि यदि सरकार द्विपक्षीय वार्ता नहीं करती है तो 25 अक्टूबर से जयपुर में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा. गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि यदि मंत्रालयिक कर्मचारियों की सुनवाई नहीं होती है तो आंदोलन को तेज कर उग्र आंदोलन किया जाएगा. मंत्रालयिक कर्मचारी अपनी वेतन कटौती, वेतन विसंगतियों, सचिवालय के आधार पर वेतन भत्ते आदि को लेकर काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं.
मंत्रालयिक कर्मचारियों की 7 सूत्रीय मांगें
राजस्थान स्टेट पैरिटी के आधार पर कनिष्ठ सहायक (लिपिक ग्रेड द्वितीय) को ग्रेड पर 3600 लेवल 10 में किया जाए और न्यूनतम योग्यता स्नातक की जाए. पूर्व में सरकार के साथ हुए समझौतों के अनुसार शेष रहे 11 हजार पदों को नवसृजित कर पदोन्नति के पदों पर मानदंडों में ढील दी जाए. 24 अप्रैल 2017 के वित्त विभाग के आदेश को पंचायत राज संस्थाओं के 12 हजार मंत्रालयिक कर्मचारियों पर लागू किया जाए.
राजस्थान के अन्य 122 विभागों के मंत्रालयिक कर्मचारियों की तर्ज पर कनिष्ठ सहायक से लेकर संस्थापन अधिकारी तक के पदोन्नति के पद भरवायए जाए. पंचायत राज संस्थाओं के मंत्रलायिक कर्मचारियों को अंतर जिला स्थानांतरण में एक बार ढील देकर पंचायत राज संस्थाओं के मंत्रालयिक कर्मचारियों को न्याय दिया जाए. शासन सचिवालय व अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत मंत्रालयिक संवर्ग के राजपत्रित व अराजपत्रित पदों में व्याप्त असमानता को दूर कर पद पदोन्नति प्रावधान एवं वेतन में समानता के लिए नियमों में संशोधन किया जाए.