जयपुर. राजधानी जयपुर की बगरू थाना पुलिस ने नेशनल हाइवे पर डीजल चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने डीजल चोरी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. NH8 से जाने वाले टैंकर चालकों से मिलीभगत करके डीजल चोरी की जा रही थी (Diesel theft on Jaipur NH8). रेलवे को सप्लाई होने वाले डीजल को चोरी करके किसानों और पेट्रोल पंप वालों को बेच रहे थे. पुलिस ने आरोपी कालू खां, विजेंद्र मीणा और राजू कुमावत को गिरफ्तार किया है.
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों ने दर्जनों वारदातें करना कबूल किया है. करीब 1700 लीटर चोरी का डीजल पुलिस ने जब्त किया है. साथ ही एक डीजल टैंकर, एक लोडिंग टेंपो, एक बाइक और कार जब्त की गई है. डीजल चोरी करने के औजार, दो गैस सिलेंडर, वायर, लोहे की पत्ती, वेल्डिंग मशीन, प्लास समेत अन्य सामग्री भी जब्त की गई है. आरोपी 1 साल से वारदात को अंजाम दे रहे थे.
अब तक करीब 1.80 लाख लीटर डीजल चोरी कर चुके हैं (1.5 crore oil theft in Jaipur). करीब 1.45 करोड़ रुपए की रेलवे और पेट्रोल पंप संचालकों को हानि पहुंचाई गई है. टैंकर चालक से डीजल प्रति लीटर 50 रुपए की दर से खरीद कर 80 रुपए प्रति लीटर की दर से किसानों और पेट्रोल पंप वालों को बेचा जा रहा था.
कर्मचारियों और रेलवे अधिकारियों की संलिप्तता पर संदेह
डीजल चोरी के खेल में रेलवे के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है. पुलिस रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता को देखते हुए जांच पड़ताल कर रही है. चोरी का डीजल खरीदने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है. एडिशनल डीसीपी वेस्ट राम सिंह और एसीपी बगरू देवेंद्र सिंह के निर्देशन में बगरू थाना अधिकारी विक्रम सिंह चारण के नेतृत्व में कार्रवाई को अंजाम दिया गया है.
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डीसीपी वेस्ट ऋचा तोमर ने बताया कि आरोपी विजेंद्र मीणा जोबनेर के बोराज गांव का रहने वाला है. आसलपुर में भारत पेट्रोलियम का पेट्रोल-डीजल स्टोरेज डिपो है.मध्य प्रदेश रिफाइनरी वाया कोटा से डिपो में पाइप लाइन से पेट्रोलियम पदार्थ इस डिपो में आता है.यहां से टैंकरों से भारतीय रेलवे जयपुर और अन्य पेट्रोल पंप पर सप्लाई होता है.आरोपी विजेंद्र मीणा और राजू कुमावत आसलपुर डिपो से ही रेलवे जयपुर और अन्य पेट्रोल पंपों को डीजल सप्लाई देने वाले टैंकर चालकों से मिलीभगत करते थे. टैंकर चालकों को प्रलोभन देकर टैंकर से डीजल चोरी करते थे.
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भारतीय रेलवे को सप्लाई देने वाले टैंकर से 500 से 600 लीटर डीजल चोरी करते थे. भारतीय रेलवे के संबंधित लोगों से मिलीभगत होने की बात भी सामने आई है. पेट्रोल पंप पर सप्लाई होने वाले टैंकरों से 50 से 60 लीटर डीजल निकालना सामने आया है. पेट्रोल पंप पर चोरी का पता नहीं लगे, इसलिए डीजल के टैंकर में कुछ मात्रा में पेट्रोल मिला देते थे. जिसके कारण नाप उतना ही दर्शाया जाता था.
'छोकन' कोड नाम था
इस मिलावट को आरोपी अपनी भाषा में 'छोकन' बोलते हैं. एक होटल के पीछे स्थित बाड़े को किराए पर लेकर डीजल निकालने का काम करते थे. टैंकर को बाड़े में ले जाकर डीजल बक्से को वेल्डिंग मशीन से काटकर टैंकर के वॉल से तार चलाकर डीजल निकालते थे. आरोपी डीजल चोरी करके ड्रम में भरते थे. वहां से लोडिंग टेंपो और अन्य वाहनों के जरिए दूसरी जगह पर रखवा देते थे. टैंकर से डीजल निकालने के बाद तार को निकाल कर वापस बक्से को वेल्डिंग कर देते थे.