जयपुर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती यानी दो अक्टूबर से एक दिन पहले प्रदेश में शांति और अहिंसा विभाग के गठन (Department of Peace and Non violence in Rajasthan) को मंजूरी मिल गई है. राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्रदेश में शांति और अहिंसा विभाग के गठन के लिए कैबिनेट की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
सीएम गहलोत ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा में प्रदेश में अलग से शांति और अहिंसा विभाग के गठन की घोषणा की थी. सीएम गहलोत की इस घोषणा को अंतिम रूप देते हुए पिछले दिनों कैबिनेट में प्रदेश में शांति और अहिंसा विभाग के गठन के प्रस्ताव को पास किया गया था. कैबिनेट में तैयार किए गए इस प्रस्ताव को राज्यपाल कलराज मिश्र के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था. हालांकि इससे पहले शांति और अहिंसा निदेशालय खोला जा चुका है, लेकिन अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद अलग से मंत्रालय भी बनेगा. सीएम गहलोत ने कहा था कि मौजूदा दौर में युवाओं को गांधी के विचारों से अधिक से अधिक जोड़ने की जरूरत है. इसके लिए राज्य सरकार ने पहले से शांति और अहिंसा निदेशालय बनाया है और अब अलग से विभाग बना रही है.
ये होगा शांति एवं अहिंसा विभाग
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रदेश में शांति और अहिंसा विभाग अस्तित्व में (Peace and Non violence Department before 2 october) आ गया है. यह विभाग प्रदेश में गांधीजी के संदेश को प्रदेश के निचले स्तर तक पहुंचाने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने के लिए काम करेगा. कला व संस्कृति विभाग इसका मूल विभाग होगा. गहलोत सरकार शांति व अहिंसा विभाग के माध्यम से नौजवानों में सत्य व अहिंसा का संदेश देने के साथ ही आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए का काम कर रहीं है.
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अलग से विभाग बनने के साथ प्रदेश में समय-समय पर गांधी के जीवन दर्शन को लेकर चित्र प्रदर्शनी लगाने के साथ ही उनसे जुड़े साहित्यों का प्रकाशन व युवाओं को महातमा गांधी के जीवन से जुड़े घटनाक्रम को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा. स्कूली बच्चों को बापू के जीवन से रूबरू कराने के लिए अन्य प्रदेशों में भी ले जाया जाएगा. यह विभाग सामाजिक न्याय विभाग के साथ मिलकर दलितों के उत्थान के लिए भी काम करेगा.