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राजस्थान हाईकोर्ट: अशोक गुप्ता की ओर से दायर याचिका खारिज, अरविंद शुक्ला बने रहेंगे जेके लोन अधीक्षक

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Published : Oct 21, 2020, 7:19 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाने के खिलाफ डॉ. अशोक गुप्ता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार को प्रशासनिक पदों को तय प्रक्रिया से भरने के लिए तीन माह का समय दिया है. न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह आदेश अशोक गुप्ता की याचिका को खारिज करते हुए दिए.

ashok gupta petition in rajasthan highcourt,  ashok gupta petition dismisses by rajasthan highcourt
अशोक गुप्ता की ओर से दायर याचिका खारिज

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाने के खिलाफ डॉ. अशोक गुप्ता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार को प्रशासनिक पदों को तय प्रक्रिया से भरने के लिए तीन माह का समय दिया है. न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह आदेश अशोक गुप्ता की याचिका को खारिज करते हुए दिए.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को अधीक्षक पद पर बने रहने का अधिकार देना कानून की नजर में उचित नहीं है. इसके अलावा याचिकाकर्ता पांच साल तक अधीक्षक रह चुके हैं. ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि राज्य सरकार ने उन्हें मनमाने तरीके से हटाया है. अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि अधीक्षक सहित अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के लिए परिपत्र के तहत आवश्यक कार्रवाई करे.

पढ़ें: रकबर मॉब लिचिंग में आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज

याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 26 जून को एक अधिसूचना जारी कर प्रशासनिक पदों पर लगे चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति एक साल के लिए बढ़ा दी. वहीं, दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा सचिव ने इस अधिसूचना के विपरीत जाकर 4 सितंबर को याचिकाकर्ता के स्थान पर डॉ. अरविंद शुक्ला को जेके लोन अस्पताल का अधीक्षक बना दिया. जबकि 26 जून की अधिसूचना के तहत दूसरे प्रशासनिक पदों पर मेडिकल शिक्षक काम कर रहे हैं.

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को अधीक्षक पद से हटाने से पहले याचिकाकर्ता को ना तो कोई नोटिस दिया गया और ना ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया. ऐसे में चार सितंबर के आदेश को रद्द किया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने गत 10 सितंबर को याचिकाकर्ता को पद से हटाने पर रोक लगा दी थी.

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाने के खिलाफ डॉ. अशोक गुप्ता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार को प्रशासनिक पदों को तय प्रक्रिया से भरने के लिए तीन माह का समय दिया है. न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह आदेश अशोक गुप्ता की याचिका को खारिज करते हुए दिए.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को अधीक्षक पद पर बने रहने का अधिकार देना कानून की नजर में उचित नहीं है. इसके अलावा याचिकाकर्ता पांच साल तक अधीक्षक रह चुके हैं. ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि राज्य सरकार ने उन्हें मनमाने तरीके से हटाया है. अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि अधीक्षक सहित अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के लिए परिपत्र के तहत आवश्यक कार्रवाई करे.

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याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 26 जून को एक अधिसूचना जारी कर प्रशासनिक पदों पर लगे चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति एक साल के लिए बढ़ा दी. वहीं, दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा सचिव ने इस अधिसूचना के विपरीत जाकर 4 सितंबर को याचिकाकर्ता के स्थान पर डॉ. अरविंद शुक्ला को जेके लोन अस्पताल का अधीक्षक बना दिया. जबकि 26 जून की अधिसूचना के तहत दूसरे प्रशासनिक पदों पर मेडिकल शिक्षक काम कर रहे हैं.

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को अधीक्षक पद से हटाने से पहले याचिकाकर्ता को ना तो कोई नोटिस दिया गया और ना ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया. ऐसे में चार सितंबर के आदेश को रद्द किया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने गत 10 सितंबर को याचिकाकर्ता को पद से हटाने पर रोक लगा दी थी.

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