अंबिकापुर: केंद्रीय जेल में बंद 19 कैदियों ने कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इतनी बड़ी खुशी मिलेगी. संगीन जुर्म के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे इन कैदियों ने अपनी 15 से 20 बरस की जिंदगी जेल की चार दिवारियों के बीच ही गुजार दी, लेकिन अब ये आजाद हो गए हैं. वो भी सिर्फ इस लिए क्योंकि इन्होंने अपने जीवन में हुई उस एक गलती से सीख ली. जेल में रहते हुए भी अपने जीवन स्तर में सुधार लाया. जेल में इन कैदियों के बर्ताव से प्रभावित होकर जेल प्रबंधन ने इन्हें छोड़ने का फैसला लिया. कोर्ट ने भी इनकी बची हुई सजा को माफ कर दिया है.
दरअसल, अंबिकापुर केंद्रीय जेल में बंद 19 कैदियों को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आजाद कर दिया गया है. इनमें से ज्यादातर कैदी हत्या जैसे कई संगीन अपराधों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे. जेल में रहने के दौरान कैदियों ने न सिर्फ अपना बर्ताव बेहतर रखा, बल्कि जेल में कई हुनर सीखकर काम भी किए. इस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी के 15 से 20 साल जेल में ही बिता दिए. जेल से रिहा होने के बाद आज इन 19 कैदियों के चेहरे पर खुशी का ठिकाना ना था. गलतियों से तौबा करते हुए इन कैदियों ने अब अपनी बची हुई जिंदगी मेहनत मजदूरी और खेती बाड़ी कर बिताने का निर्णय लिया है.
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इन कैदियों को मिली आजादी
बता दें कि जिन कैदियों को जेल से रिहा किया गया है, उनमें रामधीन आ. मानसाय, राजकुमार आ. लांजा, रतना आ. सिधवा, विजकय पटेल आ. सुखदेव, सुखी राम आ. नईहर साय, रामा आ. तेजु, राजू आ. सोमारू, ठुप्पी आ. रंजन, मंगल साय आ. गेंदा, पारसनाथ आ. मधुराम, अनूप साय आ.छोटन, चित्रों राम आ. सुदर्शन, बहोरन आ. फगुआ, आनंद गुड़वा आ. मोहर साय, तुलसाय आ. सुखराम, धनेश्वर आ. दुहन, अशोक कुमार आ. गोरखनाथ, विन्ध्येश्वरी सिंह आ. परसुराम सिंह, कमलेश आ. बाबूलाल शामिल है. कैदियों को रिहा करने के साथ ही उनके खाते में 1 लाख 70 हजार 373 रुपए का पारिश्रमिक भी दिया गया है.
प्रदेश में सर्वाधिक 19 कैदी रिहा
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रदेशभर से कुल 61 कैदियों को रिहा किया गया है. जेल प्रबन्धन की माने तो सर्वाधिक 19 कैदी अम्बिकापुर केंद्रीय जेल से रिहा किए गए हैं. बहरहाल अब देखना यह है कि जेल से बाहर आने के बाद ये कैदी अपनी गलतियों से सीख लेकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं या नहीं. ये आने वाला समय बताएगा.