भोपाल। पीड़ित महिलाओं की सुनवाई कर मदद के लिए कार्रवाई की अनुशंसा करने वाला मध्य प्रदेश महिला आयोग खुद ही असहाय नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष और दो सदस्यों के कमरों में पिछले 7 महीनों से ताला डाला हुआ है. इस वजह से ना तो आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ऑफिस में बैठ पा रही हैं और ना ही मामलों की सुनवाई हो पा रही है. पिछले 1 साल में महिला आयोग में शिकायतों की संख्या बढ़कर 12 हजार हो गई है.
शोभा ओझा ने लगाए सरकार पर आरोप
महिला आयोग के अध्यक्ष शोभा ओझा ने आरोप लगाया है कि सरकार महिला आयोग के कामों में अड़ंगा डाल रही है. जून 2020 में हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे. इसके बाद सरकार ने महिला आयोग में ताला डलवा दिया. इसकी वजह से महिला आयोग में पिछले 7 महीनों से सुनवाई ही नहीं हो सकी. उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार राजनीतिक कारणों से महिला आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को काम नहीं करने दे रही. इसी वजह से महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है. मध्यप्रदेश में महिला अत्याचारों के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं.
महिला आयोग में लंबित हैं 12,829 मामले
राज महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा कि नवगठित महिला आयोग ने जब कार्यभार ग्रहण किया था .तब करीब 10 हजार मामले महिला आयोग के पास लंबित थे. मामलों की सुनवाई ना होने की वजह से लगातार मामले बढ़ते जा रहे हैं. मौजूदा वक्त में महिला आयोग के पास 12,829 मामले लंबित हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल के चलते जब पूरे प्रदेश में लॉक डाउन था उस वक्त भी महिलाओं पर अत्याचार के 11,000 मामले प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज हैं.