चाईबासा: जिले के टोकलो थाना क्षेत्र अंतर्गत लांजी गांव के जंगल पहाड़ी क्षेत्र में आईइडी ब्लास्ट कर पुलिस जवानों को नुकसान पहुंचाया था. ब्लास्ट के दौरान 3 जवानों की मौत हो गई थी. इस मामले में जिला पुलिस ने 10 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है.
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10 नक्सली गिरफ्तार
कोल्हान रेंज के डीआईजी राजीव रंजन सिंह ने बताया कि विगत 4 मार्च को भाकपा माओवादी संगठन की बी टीम के सदस्यों ने पाइप बम का प्रयोग कर विस्फोट किया था, जिसमें झारखंड जगुआर के 3 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद पुलिस अनुसंधान करते हुए शनिवार को इस कांड में शामिल 10 नक्सलियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. डीआईजी ने बताया कि नक्सलियों की ओर से किए गए हमले में शामिल अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ने टीम गठन कर अनुसंधान शुरू किया था, जिसमें पुलिस ने रमाई हांसदा को गिरफ्तार किया था.
झारखंड जगुआर के 3 जवान हुए थे शहीद
इसके बाद उससे पूछताछ करने पर उसकी निशानदेही के अनुसार, भाकपा माओवादी के आनल दा उर्फ पतिराम मांझी और महाराजा प्रमाणिक को गिरफ्तार किया गया. उसने बताया कि सावन टूटी ने अपने सहयोगियों के साथ पाइप आईडी बम को लांजी के जंगल पहाड़ जाने वाले रास्ते पर लगाया था. दूसरे दिन सुबह सभी चारों पुलिस बल का इंतजार कर रहे थे.
उसी दौरान नक्सलियों में से एक अन्य सहयोगी पेड़ पर चढ़कर पुलिस बल की सूचना ले रहे थे और इनके अन्य सहयोगी बैटरी लगाकर इनके इशारे का इंतजार कर रहा थे. सुरक्षाबलों को आते देख नक्सली के सहयोगी ने इशारा किया, जिसके बाद इनके अन्य सहयोगी आईइडी बम विस्फोट करने के बाद जंगल पहाड़ क्षेत्र का लाभ उठाकर भाग निकले. बाद में पता चला कि झारखंड जगुआर के 3 जवान शहीद हो गए हैं.
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गिरफ्तार नक्सलियों ने दिए बयान
इनकी स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर इस षड्यंत्र में शामिल भाकपा माओवादी के सक्रिय सदस्य नेल्सन कांडीर, विल्कन सामड, सीताराम सामड, रोशन बोदरा, सोरटो माहली, सोमनाथ भूमिज, अशोक कुमार महतो, मंगल मुंडा और महादेव मुंडा ने इस आईइडी विस्फोट में भाकपा माओवादी को विस्फोट कर पुलिस बल को क्षति पहुंचाने और पुलिस बल की गतिविधियों की जानकारी देने की बात स्वीकारी है.
गिरफ्तार नक्सली माओवादियों की बी टीम
डीआईजी राजीव रंजन सिंह ने बताया कि गिरफ्तार सभी नक्सली सदस्य भाकपा माओवादी की बी-टीम है. यह टीम नक्सलियों के हथियार ढोने, विस्फोट करने और दूसरे कार्यों में इनका सहयोग करते हैं. ये लोग वर्दी नहीं पहनते हैं, जिस वजह से इन्हें गांव और जंगलों में घूमने में कोई कठिनाई नहीं होती है और बिना किसी को सूचना के ये अपना कार्य कर लेते हैं.