रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पहली से लेकर आठवीं के बच्चों को केंद्रीय योजना के तहत मध्यान भोजन मिल रहा है या नहीं इसे देखने की जिम्मेदारी प्रखंड साधन सेवियों (Block Resource Persons) और संकुल साधन सेवियों (Cluster Resource Persons) को दी गई है. समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत ये शिक्षाकर्मी प्रतिदिन 10 स्कूलों का भ्रमण कर इसकी निगरानी करेंगे.
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मिड डे मील में अनियमितता की शिकायत: लगातार मिड डे मील में अनियमितता को लेकर विभाग को शिकायतें मिल रही थी. मिड डे मील व्यवस्था को लेकर विद्यालय प्रबंधन समिति भी अपने स्तर पर देखरेख करती है. लेकिन इसका दायरा बढ़ाने और इस पूरे योजना पर विशेष निगरानी रखने के लिए अब राज्य सरकार की ओर से बीआरपी- सीआरपी कर्मचारियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है .यह कर्मचारी प्रत्येक दिन 10 स्कूलों का भ्रमण कर इसकी निगरानी करेंगे और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों के माध्यम से जिला और मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपेंगे. झारखंड राज्य मध्यान भोजन प्राधिकरण और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से संयुक्त रूप से इसे लेकर निर्देश भी जारी किया गया है.
विभाग की ओर से सभी जिलों में वित्तीय वर्ष 2020-21 का 134 दिनों के कुकिंग कॉस्ट मद की राशि और 2021-22 के 20 दिनों के गर्मी छुट्टी के मद की राशि विद्यार्थियों के बैंक खाते में डीबीटी करने का निर्देश भी जारी कर दिया गया है. बीआरपी सीआरपी को इन सभी की निगरानी करनी है. बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में मिड डे मील से जुड़ी राशि मिली कि नहीं इसकी भी जानकारी उन्हें तमाम अभिभावकों से मिलकर इकट्ठा करना है .
स्कूलों में एलपीजी कनेक्शन: इसके अलावे तमाम ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में भी एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है .क्या अभी भी लकड़ी या किसी अन्य चीज से मिड डे मील बन रहा है. इसकी रिपोर्ट भी सौपने का आदेश जारी हुआ है .जरूरत पड़ने पर तत्काल सिलेंडर खरीद कर प्रस्ताव बजट में शामिल किया जाएगा .इस दिशा में कदम बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.