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फोन टैपिंग मामले में अधूरे तथ्यों पर एफआईआर दर्ज करने का दावा, आरोपी इंस्पेक्टर ने दायर की याचिका - रांची में फोन टैपिंग की खबर

सीआईडी में चर्चित फोन टैपिंग कांड में अधूरे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगा है. सीआईडी के एफआईआर में तीन पुलिसकर्मियों को अपराधी बताकर फोन टैप करने के आरोप में इंस्पेक्टर अजय कुमार साहू को आरोपी बनाया गया था. आरोपी इंस्पेक्टर ने सब डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां पीटिशन दायर किया है.

FIR on incomplete facts in phone tapping case in ranchi
सीआईडी
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Published : Sep 18, 2020, 9:49 PM IST

रांची: सीआईडी में चर्चित फोन टैपिंग कांड में अधूरे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगा है. सीआईडी के एफआईआर में तीन पुलिसकर्मियों को अपराधी बताकर फोन टैप करने के आरोप में इंस्पेक्टर अजय कुमार साहू को आरोपी बनाया गया था. स्पेशल ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर अजय साहू ने अब पूरे मामले में सब डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां याचिका दायर की है.

याचिका में अजय कुमार साहू ने दावा किया है कि एफआईआर की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है. कोर्ट से मांग की गई है कि केस की जांच सही तरीके से तब तक संभव नहीं है, जबतक कई संबंधित नंबरों के कॉल डाटा को सुरक्षित नहीं रखा जाए. याचिका में बताया गया है कि तीनों पुलिसकर्मी अपराधियों से बात करते थे. जिसके बाद उनका नंबर टैप किया गया था. लेकिन इस तथ्य को सीआईडी ने अपने एफआईआर में नहीं लिखा.

अपराधियों से होती थी पुलिसकर्मियों की बातचीत

कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि एफआईआर में मो इरफान के मोबाइल नंबर 9898532557 का जिक्र है. इस मोबाइल मो इरफान पशु तस्कर मंटू सिंह उर्फ उदय सिंह से उसके मोबाइल नंबर 7004606966 और 7070617300 से लगातार संपर्क में था. थानेदार रहे रतन कुमार सिंह के मोबाइल नंबर 9572060917 से कई बार अपराधी अफसर इमाम के मोबाइल नंबर 9113478781 पर संपर्क किया गया था. वहीं चुटिया थाने में तैनात रहे एसआई रंजीत सिंह ने अपने मोबाइल नंबर 8084587477 से अपराधी डबलू सिंह और उसके भाई बबलू सिंह से मोबाइल नंबर 7979763094 व 6206225378 पर संपर्क किया जाता था. गौरतलब है कि डब्लू सिंह को रांची पुलिस ने रेलवे के ठेकों को मैनेज करने के लिए ठेकेदारों को जान से मारने की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया था.

तकनीकी सेल के प्रभारी के आदेश से टैप हुए फोन

याचिका में बताया गया है कि जिन तीन नंबरों के द्वारा अपराधियों से बात होती थी, उनके नंबरों को सर्विलांस पर रखने का आदेश तकनीकी सेल प्रभारी से लिया गया था. प्रोटोकॉल के मुताबिक, रिकार्डिंग सुने व इसके हैडरीटेन ट्रांसक्रिप्ट भी तैयार किए गए थे. इंस्पेक्टर का आरोप है कि बार-बार उन्होंने सीआईडी के जांच अधिकारी से उन नंबरों के डाटा भी सुरक्षित रखने का निवेदन किया था, जिनसे पुलिसकर्मियों की बात होती थी. सीआईडी में डाटा सुरक्षित रखने के लिए 23 जुलाई और 19 सितंबर को आवेदन भी दिए गए थे.

ये भी देखें- ITI कॉलेज संचालन मामले पर हाई कोर्ट गंभीर, कार्मिक सचिव को किया तलब, मांगा जवाब

कोर्ट में दिए आवेदन में बताया गया है कि चुटिया थाने के केस में अपराधी डब्लू शर्मा के खिलाफ चार्जशीट करने में देरी कर एसआई रंजीत सिंह के द्वारा मदद पहुंचाया जा रहा था. ऐसे में उसे निलंबित कर विभागीय कार्रवाई भी की गई थी. याचिकाकर्ता इंस्पेक्टर ने कोर्ट को बताया है कि रंजीत सिंह की अपराधियों की बातचीत सिटी एसपी अमित कुमार ने राजारानी कोठी स्थित सीआईडी मुख्यालय आकर सुनी थी. इस मामले में तात्कालिन एसएसपी रांची को भी पूरे मामले की जानकारी थी. जिसके बाद उन्होंने रांची सिटी एसपी को सीआईडी मुख्यालय भेजा था. यहीं वजह है कि रंजीत सिंह पर विभागीय कार्रवाई भी की गई थी.

रांची: सीआईडी में चर्चित फोन टैपिंग कांड में अधूरे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगा है. सीआईडी के एफआईआर में तीन पुलिसकर्मियों को अपराधी बताकर फोन टैप करने के आरोप में इंस्पेक्टर अजय कुमार साहू को आरोपी बनाया गया था. स्पेशल ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर अजय साहू ने अब पूरे मामले में सब डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां याचिका दायर की है.

याचिका में अजय कुमार साहू ने दावा किया है कि एफआईआर की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है. कोर्ट से मांग की गई है कि केस की जांच सही तरीके से तब तक संभव नहीं है, जबतक कई संबंधित नंबरों के कॉल डाटा को सुरक्षित नहीं रखा जाए. याचिका में बताया गया है कि तीनों पुलिसकर्मी अपराधियों से बात करते थे. जिसके बाद उनका नंबर टैप किया गया था. लेकिन इस तथ्य को सीआईडी ने अपने एफआईआर में नहीं लिखा.

अपराधियों से होती थी पुलिसकर्मियों की बातचीत

कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि एफआईआर में मो इरफान के मोबाइल नंबर 9898532557 का जिक्र है. इस मोबाइल मो इरफान पशु तस्कर मंटू सिंह उर्फ उदय सिंह से उसके मोबाइल नंबर 7004606966 और 7070617300 से लगातार संपर्क में था. थानेदार रहे रतन कुमार सिंह के मोबाइल नंबर 9572060917 से कई बार अपराधी अफसर इमाम के मोबाइल नंबर 9113478781 पर संपर्क किया गया था. वहीं चुटिया थाने में तैनात रहे एसआई रंजीत सिंह ने अपने मोबाइल नंबर 8084587477 से अपराधी डबलू सिंह और उसके भाई बबलू सिंह से मोबाइल नंबर 7979763094 व 6206225378 पर संपर्क किया जाता था. गौरतलब है कि डब्लू सिंह को रांची पुलिस ने रेलवे के ठेकों को मैनेज करने के लिए ठेकेदारों को जान से मारने की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया था.

तकनीकी सेल के प्रभारी के आदेश से टैप हुए फोन

याचिका में बताया गया है कि जिन तीन नंबरों के द्वारा अपराधियों से बात होती थी, उनके नंबरों को सर्विलांस पर रखने का आदेश तकनीकी सेल प्रभारी से लिया गया था. प्रोटोकॉल के मुताबिक, रिकार्डिंग सुने व इसके हैडरीटेन ट्रांसक्रिप्ट भी तैयार किए गए थे. इंस्पेक्टर का आरोप है कि बार-बार उन्होंने सीआईडी के जांच अधिकारी से उन नंबरों के डाटा भी सुरक्षित रखने का निवेदन किया था, जिनसे पुलिसकर्मियों की बात होती थी. सीआईडी में डाटा सुरक्षित रखने के लिए 23 जुलाई और 19 सितंबर को आवेदन भी दिए गए थे.

ये भी देखें- ITI कॉलेज संचालन मामले पर हाई कोर्ट गंभीर, कार्मिक सचिव को किया तलब, मांगा जवाब

कोर्ट में दिए आवेदन में बताया गया है कि चुटिया थाने के केस में अपराधी डब्लू शर्मा के खिलाफ चार्जशीट करने में देरी कर एसआई रंजीत सिंह के द्वारा मदद पहुंचाया जा रहा था. ऐसे में उसे निलंबित कर विभागीय कार्रवाई भी की गई थी. याचिकाकर्ता इंस्पेक्टर ने कोर्ट को बताया है कि रंजीत सिंह की अपराधियों की बातचीत सिटी एसपी अमित कुमार ने राजारानी कोठी स्थित सीआईडी मुख्यालय आकर सुनी थी. इस मामले में तात्कालिन एसएसपी रांची को भी पूरे मामले की जानकारी थी. जिसके बाद उन्होंने रांची सिटी एसपी को सीआईडी मुख्यालय भेजा था. यहीं वजह है कि रंजीत सिंह पर विभागीय कार्रवाई भी की गई थी.

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