मंडी: महिला दिवस पर अपने दृढ़ संकल्प से तमाम मुश्किलों को पार करती और अपनी सफलता की इबारत खुद लिखती देवभूमि की एक और बेटी की कहानी हम आपके लिए लाए हैं. मंडी जिला की सफल महिला किसान कल्पना की संघर्ष की दास्तां सुन आप भी कल्पना के जज्बे को सलाम करेंगे.
कहते हैं कि मन में अगर दृढ संकल्प हो तो मनुष्य के लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सुंदरनगर के डोढवां गांव की 43 वर्षीय महिला किसान कल्पना शर्मा ने. कल्पना के संघर्षमय जीवन की शुरुआत तब हुई जब साल 2002 में उसके पति पर पेड़ गिरने से उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और वे दिव्यांग हो गए. घर में तीन बच्चों का पालन पोषण और पढ़ाई के साथ पति के इलाज का पूरा खर्चा कल्पना के सिर आ गया.
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पति के दिव्यांग होने के बाद बीए पास कल्पना ने हर जगह नौकरी तलाश की, लेकिन किसी ने उसे काम नहीं दिया. आजीविका कमाने का और कोई साधन न होने पर कल्पना ने अपनी एक हैक्टेयर जमीन में खेती करना शुरू किया. कल्पना ने परंपरागत फसलें जैसे मक्की, धान व गेहूं लगाकर खेती की शुरुआत की, लेकिन फिर भी कड़ी मेहनत के बावजूद उसके परिवार की आर्थिक स्थिति में कोई अधिक सुधार नहीं आया. जिसके बाद कल्पना ने सब्जियों की खेती शुरू की.
फरवरी 2015 में कल्पना ने हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में संरक्षित खेती का प्रशिक्षण लिया. जिसके बाद उन्होंने कृषि विभाग की पॉलीहाउस परियोजना से अनुदान लेकर 250 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस का निर्माण किया. कल्पना ने कृषि विज्ञान केंद्र मंडी के वैज्ञानिकों के तकनीकी सहयोग से पॉलीहाउस में हाइब्रिड शिमला मिर्च व खीरे की खेती करना शुरू किया. ये पहल धीरे-धीरे रंग लाने लगी और उनकी परिवारिक आर्थिक दशा सुधारने में सफल साबित हुई.
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साल 2016 में उन्होंने 250 वर्गमीटर के दूसरे व साल 2018 में तीसरे पॉलीहाउस का निर्माण किया. वर्तमान में कल्पना ने पॉलीहाउस में खेती करने वाली एक सफल महिला उद्यमी के रूप में एक पहचान स्थापित की है. फसल, सब्जी उत्पादन व पशु पालन व्यवसाय व पॉलीहाउस में खेती के काम से वे अपनी आजीविका कमा रही हैं. कल्पना हर रविवार जवाहर पार्क सुंदरनगर के बाहर लगने वाली मार्केट में खुद सब्जियां बेचती हैं. कृषि की उन्नत तकनीकों को अपना कर उत्पादन में वृद्धि करने के साथ-साथ अपने उत्पाद को खुद मार्केट में लाकर बेचना कल्पना का एक सराहनीय प्रयास है जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है.
केवीके सुंदरनगर के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज सूद ने बताया कि जिस दौरान कल्पना आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं, उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के सम्पर्क में आकर संरक्षण खेती के बारे में जानकारी हासिल की. उन्होंने गौरवान्वित स्वर में कहा कि वर्तमान में कल्पना तीन-तीन पॉली हाउस में खेती कर परिवार का गुजारा करती है और एक सफल किसान बन कर सामने आई हैं. उनके अनुभव को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की अंतिम वर्ष की कुछ छात्राओं को रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपिरिएंस के तहत उनके साथ अटैच किया गया है ताकि वे उनके अनुभव का प्रैक्टीकल तौर पर लाभ उठा सकें.
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कल्पना का कहना है कि बचपन से जिन सपनों को लेकर चली थीं, वो सपने कभी पूरे नहीं हो पाए. उन्होंने बताया कि वो एक आईपीएस अधिकारी बनना चाहती थीं और पढ़ाई भी उसी अनुसार चल रही थी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद साल 2002 में पति पर पेड़ गिर गया, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. परिवार के करता-धरता ने जब बिस्तर पकड़ लिया तो उनके ऊपर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. आय का कोई साधन नहीं होने पर उनकी पढ़ाई पर भी पूरी तरह से विराम लग गया.
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कल्पना ने बताया कि साल 2015 में उन्होंने अपनी जमीन पर काम करने की सूझी और सरकारी अनुदान से पॉली हाउस लगाया और केसीसी के जरिए पैसा जुटा कर काम करना शुरू किया. उन्होंने बताया कि वर्तमान में वो तीन-तीन पॉली हाउस लगा खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं.
कल्पना ने युवाओ से आग्रह किया है कि वे अपनी जमीन को खाली न छोड़ें. उन्होंने कहा कि आईपीएस अफसर बनने का सपना उनका भले ही पूरा न हुआ हो, लेकिन वो आज धरती मां की आईपीएस जरूर बन गई हैं.