मंडीः चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पंडोह से औट तक खतरों का हाईवे बनकर रह गया है. आए दिन पहाड़ी से पत्थर गिरना और कभी भी पहाड़ों का दरक जाना, इस हाईवे की पहचान बनता जा रहा है. इसके बाद जिला प्रशासन ने आईआईटी मंडी के सहयोग से पहाड़ी पर सेंसर लगाए, ताकि पहाड़ी के खिसकने का संकेत पहले ही मिल जाए और बड़ी अनहोनी से बचा जा सके. दो वर्ष पहले जो सेंसर पहाड़ी पर लगाए गए थे उनमें इस बार काफी ज्यादा मूवमेंट दर्ज की जा रही है.
संकेत स्पष्ट है कि पहाड़ियां धीरे-धीरे खिसक रही हैं और किसी बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रही हैं. डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि जो सेंसर लगाए गए हैं उनमें पहाड़ी के खिसकने की मूवमेंट दर्ज की जा रही है और इसकी रोकथाम के कोई बड़ी योजना बनाने पर काम करना शुरू कर दिया गया है.
बता दें कि पंडोह से औट तक फोरलेन का निर्माण कार्य भी चला हुआ है, लेकिन यहां पर सुखद बात यह है कि यह फोरलेन टनलों के माध्यम से बनाया जा रहा है. जब टनलों का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा तो फिर खतरों वाले हाईवे से यातायात कम हो जाएगा.
इस कार्य में अभी तीन से चार सालों का समय लगने वाला है. इस क्षेत्र में कब आपकी चलती गाड़ी पर पत्थर आकर गिर जाए ये कोई नहीं जानता. बीते वर्षों में पहाड़ से चलती गाडि़यों पर पत्थर गिरने के कारण कुछ लोग काल का ग्रास बन चुके हैं, जबकि कुछ चोटिल होकर आज भी नसीब को कोस रहे हैं.
टैक्सी चालकों और स्थानीय लोगों की मानें तो इस हाईवे पर सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है. यही कारण है कि स्थानीय लोग या तो यहां से मजबूरी में जाते हैं या फिर वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेते हैं. लोगों ने प्रशासन व सरकार से इस ओर विशेष ध्यान देने की गुहार लगाई है.
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