मंडी: करसोग उपमंडल में डंपिंग साइट को लेकर ग्रामीणों और नगर पंचायत के बीच लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है. केलोधार के बालना गांव में की जा रही डंपिंग के विरोध में पंचायत भी सामने आ गई है. यहां शनिवार को पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों ने डंपिंग साइट पर कूड़ा लेकर आए ट्रैक्टर को वापस भेज दिया. ऐसे में पार्षदों और कनिष्ठ अभियंता सहित नगर पंचायत की अध्यक्ष सीमा गुप्ता भी विवाद को सुलझाने स्पॉट पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने एक न सुनी.
ग्रामीणों का कहना था कि कूड़े को बिखरने से रोकने के लिए नगर पंचायत ने ग्रामीणों को डंपिंग साइट के चारों ओर बाउंड्री वॉल लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बाद भी कई सालों से डंपिंग साइट को बाउंड्री वॉल से कवर नहीं किया गया है. ऐसे में गंदगी फैलने से डंपिंग साइट पर जानवरों का आतंक बढ़ गया है. ये जानवर कूड़े को गांव तक लेकर आ रहे हैं, जिससे घरों के आसपास चारों तरफ गंदगी फैल ही है. यही नहीं डंपिंग साइट पर आ रहे जानवर खेती को भी उजाड़ रहे हैं. जिस कारण किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों की वजह से करीब 85 बीघा कृषि योग्य भूमि बंजर रखने की नौबत आ गई है. ऐसे में डंपिंग साइट को तुरंत प्रभाव हटाया जाना चाहिए. ग्राम पंचायत केलोधार के प्रधान मोहर सिंह का कहना है कि बालना गांव में पांच साल पहले डंपिंग साइट चिन्हित की गई थी. इसके ग्राम पंचायत ने कोई एनओसी जारी नहीं किया है.
ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन निजी भूमि के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया. अब कूड़ा अधिक फैलने की वजह से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है. जिस कारण कूड़े के ट्रैक्टर को वापस भेजा गया. नगर पंचायत अध्यक्ष सीमा गुप्ता का कहना है कि ग्रामीण डंपिंग साइट का विरोध कर रहे हैं. जिस कारण कूड़े एकत्रित करने में बाधा आ रही है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द समस्या का समाधान किया जाएगा.
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