नई दिल्ली: सर्दियों में दिल्ली में बढ़ने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए सीएम केजरीवाल ने गुरुवार को पर्यावरण के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ के साथ एक बैठक की. जिसमें विशेषज्ञों ने दिल्ली सरकार के साल 2016 में प्रदूषण कम करने के लिए निजी वाहनों पर पर लागू odd-even पॉलिसी को बेहतर विकल्प बताया.
वर्ष 2016 में जनवरी के महीने में जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था तब तत्कालीन परिवहन मंत्री गोपाल राय ने पहली बार दिल्ली में odd-even पॉलिसी को लागू किया था. 15 दिनों तक यह पॉलिसी दिल्ली में लागू रहा.
odd-even पॉलिसी आपातकालीन उपाय
ऑड-ईवन योजना के दौरान प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई थी. मुख्यमंत्री ने आज एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट ऑफ़ शिकागो विश्वविद्यालय से आए विशेषज्ञों तथा कार्यकारी निदेशक डॉ. केन ली के सामने पूरे आंकड़े भी बताएं.
उन्होंने कहा कि तब दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 14 से 16% की गिरावट आई थी. सर्दियों के दौरान अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहता है तो odd-even पॉलिसी को लागू करना भी एक आपातकालीन उपाय हो सकता है.
निजी वाहनों का हो कम इस्तेमाल
दिल्ली सरकार की odd-even पॉलिसी को वर्ल्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीईओ ओपी अग्रवाल ने भी समर्थन किया. उन्होंने कहा अल्पावधि में दिल्ली सरकार को शहर में निजी ऑटोमोबाइल के अंधाधुंध उपयोग को रोकने के उपायों पर गौर करना चाहिए.
जिसमें odd-even शामिल है. सरकार एक साथ लंबी अवधि में सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करें तो लोगों को फायदा मिलेगा. लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल कम कर देंगे.
प्रदूषण मास्क फायदेमंद तरीका
विशेषज्ञों ने सिफारिश की है कि विभिन्न दीर्घकालिक उपायों को प्रभावी होने में समय लगता है. लेकिन प्रदूषण मास्क का उपयोग एक प्रभावी जोखिम स्वयं उपाय के रूप में फायदेमंद हो सकता है.
क्या है ऑड-ईवन पॉलिसी?
बता दें कि odd-even योजना के तहत दिल्ली की सड़कों पर सिर्फ विषम संख्या यानि 1,3,5,7, 9 नंबर वाले गाड़ियों को चलने की इजाजत होती है. वहीं even वाले दिन सम संख्या यानी जिस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के अंत मे संख्या 2, 4, 6, 8 होता था उन्हें ही दिल्ली की सड़कों पर चलने की अनुमति दी गई थी. इसका पालन नहीं करने वाले को 2000 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान था.