हैदराबाद : यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों के जमावड़े को लेकर तनाव उत्पन्न हो गया है. इस बार रूसी सेनाओं की संख्या 2014 से ज्यादा है. यूरोपियन संघ के वरिष्ठ राजनय का कहना है कि टकराव जैसी स्थिति बनने का खतरा है. यूक्रेन की सीमा पर इसके पहले इतना बड़ा जमावड़ा नहीं देखा गया है. खुफिया सूत्रों ने डेढ़ लाख सेना के एकत्रित होने का अनुमान लगाया है. क्रेमलिन ने कहा है कि वह यूक्रेन को अस्थिर करने का इरादा नहीं रखता है. उनके अनुसार सेना का मूवमेंट रक्षात्मक कदम है. रूस ने कहा कि डोनबास क्षेत्र में फैले संघर्ष में उसकी कोई भूमिका नहीं है. डोनेस्टक और लुहांसक डोनबास क्षेत्र का ही हिस्सा है. हालांकि, रूसी सेना की गतिविधि के बाद पश्चिमी देशों के साथ उनकी दूरी और बढ़ गई है. रूस में अलेक्सी नवलेनी को जेल में डालने के बाद से पश्चिमी देश रूस पर अधिक्र आक्रामक रहे हैं.
रूस ने 2014 में यूक्रेन के क्रीमियन प्रायद्वीप को मिला लिया था. तब से यूक्रेन और रूस के बीच तनाव जारी है. पूर्वी यूक्रेन में रूसी समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेन की सेना के बीच कई बार भीषण संघर्ष हो चुके हैं.
यूक्रेन ने यूरोपियन संघ के मानवाधिकार कोर्ट में रूस के खिलाफ शिकायत की है. उन पर क्रीमियन प्रायद्वीप में मानव अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.
संयुक्त राष्ट्र ने 11 फरवरी को रूस को इस क्षेत्र में शांति के रास्ते में अवरोधक बताया है.
26 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वह क्रीमिया पर अवैध कब्जे को कभी मान्यता नहीं देंगे.
दो मार्च को यूरोपियन संघ के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने कहा कि रूस के खिलाफ प्रतिबंध जारी रहेगा.
पांच मार्च को कीव ने यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और पश्चिमी देशों से हस्तक्षेप की मांग की.
मास्को ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया.
नौ मार्च को यूक्रेन ने फ्रांस और जर्मनी के साथ शिखर सम्मेलन की मांग की. इस सम्मेलन में रूस को भी शामिल करने की मांग दोहराई.
26 मार्च को यूक्रेन के चार सैनिक मारे गए. डोनेस्टक के उत्तरी हिस्से में बमबारी की गई थी.
यूक्रेन और रूस दोनों ने एक दूसरे को इस हिंसा के लिए जिम्मेवार ठहराया है.
31 मार्च को कीव और वाशिंगटन दोनों ने यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों के एकत्रित होने की खबर दी. यूक्रेन के उन इलाकों के नजदीक रूसी सैनिक हैं, जहां पर रूसी अलगाववादियों की संख्या अधिक है.
एक अप्रैल को रूस ने इसे सामान्य मूवमेंट बताया.
क्रेमलिन ने कहा कि वह यूक्रेन को धमकी नहीं दे रहा है. इससे पहले अमेरिका ने रूस को चेतावनी दी थी.
जो बाइडेन ने दो अप्रैल को यूक्रेन को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया.
फ्रांस, जर्मनी और यूरोपियन संघ ने तनाव पर चिंता व्यक्त की.
छह अप्रैल को रूस ने कहा कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता दिए जाने से स्थिति और गंभीर हो सकती है. दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने नाटो की सदस्यता जल्दी से जल्दी प्रदान करने की मांग की.
आठ अप्रैल को जर्मनी ने रूस से तनाव घटाने की अपील की.
नौ अप्रैल को टर्की ने कहा कि अमेरिका अपने दो युद्धपोत भेजने की तैयारी कर रहा है. बॉसफोरस के रास्ते ब्लैक सी में अमेरिकी युद्धपोत दाखिल हो सकता है.
11 अप्रैल को रूस ने कहा कि वह यूक्रेन के साथ युद्ध की ओर नहीं बढ़ रहा है. अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटनी ब्लिंकेन ने रूस को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी.
12 अप्रैल को जी-7 के विदेश मंत्रियों और यूरोपियन संघ के विदेश नीति के प्रमुख ने रूस को उकसावे वाली कार्रवाई से बाज आने को कहा.
मास्को ने 13 अप्रैल को शिकायत की कि अमेरिकन सैनिकों को यूरोप भेजा जा रहा है. इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने जर्मनी में 500 अमेरिकन सैनिकों को भेजने का ऐलान किया था.
नाटो ने यूक्रेन के विदेश मंत्री द्मित्रो कुलेबा के साथ बैठक के दौरान रूसी सैनिकों के जमावड़े को अनुचित बताया.
जो बाइडेन ने पुतिन से तनाव घटाने को लेकर कदम उठाने को कहा.