नई दिल्ली : इस साल भारत में तकनीकी खर्च 9.6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और आईटी खर्च में वृद्धि पूर्व-महामारी के स्तर को फिर से हासिल करने के लिए तैयार है. इस तरह 2024 के और भी बेहतर होने की उम्मीद है. फॉरेस्टर के '2023 और 2024 के लिए इंडिया टेक मार्केट आउटलुक' के अनुसार, 2023 वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 0.8 प्रतिशत की वृद्धि के लिए तैयार है.
फिर भी, यह अभी भी यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण गिरते रुपये और बढ़ते चालू खाता घाटे की चुनौतियों का सामना कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेक आउटसोर्सिंग और हार्डवेयर मेंटेनेंस में तेजी से विकास देखने को मिलेगा. निष्कर्ष बताते हैं, भारतीय कंपनियां 100 प्रतिशत स्वामित्व वाले आईटी मॉडल से प्रोजेक्ट-आधारित आउटसोर्स मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, नई प्रौद्योगिकियां उपभोक्ताओं और व्यवसायों की कल्पना पर अपना काबू कर लेती हैं.
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भारतीय तकनीक निर्माता अब पूरी तरह से खुद के द्वारा नई तकनीकों पर उत्पादों का स्वामित्व, निर्माण, रखरखाव और संचालन नहीं करना चाहते हैं. टेलीकॉम में बड़ा निवेश देखने को मिलेगा. पिछले वर्ष में, 5जी घोषणाओं और आईओटी, वेब3, मेटावर्स, एआई, और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों में निवेश का दूरसंचार पर बड़ा प्रभाव पड़ा है.
हालांकि, सॉफ्टवेयर और तकनीकी परामर्श और सिस्टम एकीकरण धीमा हो जाएगा. रिपोर्ट में कहा गया है, सॉफ्टवेयर खर्च में वृद्धि 2022 में 15 फीसदी से 2023 में 14.5 फीसदी तक कम हो जाएगी. टेक कंसल्टिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन में खर्च की वृद्धि उच्च बनी रहेगी, हालांकि यह 2022 में 11 प्रतिशत से थोड़ा कम होकर 2023 में 10.2 प्रतिशत हो जाएगा. मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर को एक सेवा के रूप में अपनाने और प्रमुख आईटी संचालन या कार्यान्वयन के आउटसोर्सिग के कारण.
रिपोर्ट में कहा गया है, भारतीय कंपनियां खुद को ऐसी स्थिति में पाती हैं जहां उन्हें राजस्व वृद्धि और नए ग्राहक अधिग्रहण का समर्थन करने के लिए लागत प्रभावी तरीके से नई तकनीकों को अपनाने जैसी पहल करनी चाहिए.
(आईएएनएस)