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पटना उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या के आरोपी को बरी किया - man sentenced to death

एक व्यक्ति को पत्नी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी. पटना हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करने का आदेश देते हुए उसे बरी कर दिया.

पटना उच्च न्यायालय
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Published : Jun 23, 2021, 7:06 AM IST

पटना : पटना उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या करने के आरोपी एक व्यक्ति को बरी कर दिया है. गोपालगंज जिले की एक स्थानीय अदालत ने व्यक्ति को अपनी पत्नी की 2007 में हत्या के लिए मौत की सजा सुनायी थी.

न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरविंद श्रीवास्तव की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए आदेश दिया, अगर किसी अन्य मामले में जरूरत न हो तो दोषी को रिहा किया जाए. पीठ ने कहा, कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूतों के अभाव में निचली अदालत ने याचिकाकर्ता को भादंवि की धारा 302 के तहत केवल नैतिक आधार पर दोषी ठहराया.

हरदियां गांव के निवासी और याचिकाकर्ता नसरुद्दीन ने गोपालगंज जिला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 29 मार्च 2019 को पारित फैसले को उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी. निचली अदालत ने व्यक्ति को अपनी पत्नी संजीदा खातून (23) की दहेज के लिए हत्या का दोषी ठहराया था.

पढ़ें- मस्जिद ढहाने के मामले में कोर्ट ने बाराबंकी के पूर्व SDM को जारी किया नोटिस

पीठ ने कहा, उच्चतम न्यायालय ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि अदालतों और न्यायाधीशों को सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए और अपराध की भयावहता एवं व्यक्ति के चरित्र से प्रभावित नहीं होना चाहिए. एक न्यायाधीश द्वारा निर्णय समाज की कार्यप्रणाली लेकर अपने स्वयं के कल्पित मानदंडों से अप्रभावित होकर किया जाना चाहिए.

नसरुद्दीन ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी अपील में कहा था कि उसे दहेज के लिए अपनी पत्नी की हत्या के लिए झूठा फंसाया गया था. उच्च न्यायालय ने कहा, जहां तक भादवि की धारा 302 के तहत याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि का संबंध है, यह रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि महिला की हत्या के प्रत्यक्ष साक्ष्य का पूर्ण अभाव है. याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है.

(पीटीआई -भाषा)

पटना : पटना उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या करने के आरोपी एक व्यक्ति को बरी कर दिया है. गोपालगंज जिले की एक स्थानीय अदालत ने व्यक्ति को अपनी पत्नी की 2007 में हत्या के लिए मौत की सजा सुनायी थी.

न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरविंद श्रीवास्तव की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए आदेश दिया, अगर किसी अन्य मामले में जरूरत न हो तो दोषी को रिहा किया जाए. पीठ ने कहा, कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूतों के अभाव में निचली अदालत ने याचिकाकर्ता को भादंवि की धारा 302 के तहत केवल नैतिक आधार पर दोषी ठहराया.

हरदियां गांव के निवासी और याचिकाकर्ता नसरुद्दीन ने गोपालगंज जिला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 29 मार्च 2019 को पारित फैसले को उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी. निचली अदालत ने व्यक्ति को अपनी पत्नी संजीदा खातून (23) की दहेज के लिए हत्या का दोषी ठहराया था.

पढ़ें- मस्जिद ढहाने के मामले में कोर्ट ने बाराबंकी के पूर्व SDM को जारी किया नोटिस

पीठ ने कहा, उच्चतम न्यायालय ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि अदालतों और न्यायाधीशों को सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए और अपराध की भयावहता एवं व्यक्ति के चरित्र से प्रभावित नहीं होना चाहिए. एक न्यायाधीश द्वारा निर्णय समाज की कार्यप्रणाली लेकर अपने स्वयं के कल्पित मानदंडों से अप्रभावित होकर किया जाना चाहिए.

नसरुद्दीन ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी अपील में कहा था कि उसे दहेज के लिए अपनी पत्नी की हत्या के लिए झूठा फंसाया गया था. उच्च न्यायालय ने कहा, जहां तक भादवि की धारा 302 के तहत याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि का संबंध है, यह रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि महिला की हत्या के प्रत्यक्ष साक्ष्य का पूर्ण अभाव है. याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है.

(पीटीआई -भाषा)

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