नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि यूरोपीय सांसदों का एक शिष्टमंडल बीते दिनों 'निजी दौरे' पर भारत आया था और निजी इच्छा पर ही उसने कश्मीर की भी यात्रा की थी. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
किशन रेड्डी ने कहा, 'जम्मू कश्मीर की सरकार ने यह जानकारी दी है कि यूरोपीय संसद के 27 सदस्य, जो सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों सहित विभिन्न पार्टियों के थे, दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार नॉनएलाइंड स्टडीज के निमंत्रण पर 28 अक्तूबर से एक नवम्बर तक भारत के निजी दौरे पर आये थे.'
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रेड्डी ने इन प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी कि किस संस्थान ने कश्मीर दौरे का खर्च वहन किया और इसका आयोजन करने वाली संस्था क्या केन्द्र सरकार के संयोजन संस्थान की तरह काम कर रही है?
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार जम्मू-कश्मीर मुद्दे में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करने की अपनी नीति से 'हट गयी' है.
रेड्डी ने कहा कि भारत का यह सतत रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ यदि कोई मुद्दा है तो उस पर द्विपक्षीय ढंग से विचार विमर्श किया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि अगस्त में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के बाद की स्थिति का जायजा लेने के लिए 23 यूरोपीय सांसदों का एक दल दो दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर गया था.
वस्तुतः यूरोपीय सांसदों के शिष्टमंडल में 27 सदस्य भारत आये थे, जिनमें 23 कश्मीर दौरे पर गये थे.