कटक : ओडिशा के कटक में स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में इलाज के दौरान बालासोर ट्रेन हादसे के एक और शिकार की मौत हो गई. अधिकारियों ने कहा कि बिहार के रहने वाले 32 वर्षीय व्यक्ति की शनिवार को एससीबी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है. मृतक की पहचान बिहार निवासी सोहिम मंसूर (32) के रूप में हुई है. उन्हें इस ट्रेन हादसे के बाद एससीबी के ट्रॉमा केयर के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था. शनिवार को एससीबी अस्पताल के प्रबंधन ने उनके निधन की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उन्हें कई चोटें आई थीं, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज गुर्दे से जुड़ी बीमारी से भी पीड़ित था और उसका डायलिसिस भी चल रहा था. इस मौत के बाद हादसे में मरने वालों की कुल संख्या 291 हो गई है.
एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधांशु शेखर मिश्रा ने कहा कि मरीज की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई. उन्होंने बताया कि मंसूर को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की कई चोटें थीं और गुर्दे की समस्या भी थी. मिश्रा ने कहा कि एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती 205 मरीजों में से 46 का अभी इलाज चल रहा है, जिनमें 13 मरीज आईसीयू में हैं. आईसीयू में भर्ती 13 मरीजों में से दो से तीन व्यक्तियों की हालत गंभीर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि बाकी मरीजों की हालत स्थिर है. बिहार के गोपालगंज जिले के पाथरा गांव के रहने वाले 22 वर्षीय प्रवासी श्रमिक प्रकाश राम की शुक्रवार को एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई थी. इससे पहले मंगलवार को बिहार के रहने वाले बिजय पासवान नाम के एक यात्री ने कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दम तोड़ दिया था.
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बता दें कि गत दो जून को हुए तीन ट्रेन हादसे में 287 व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 1,208 अन्य घायल हो गए थे. इस दुर्घटना में तीन ट्रेन-शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस, बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी शामिल थी. एक अधिकारी ने कहा कि इस बीच, एम्स भुवनेश्वर में 81 शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पायी है. एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि 70 से अधिक लोगों ने डीएनए जांच के लिए अपने रक्त के नमूने पहले ही दे दिए हैं, फिर भी सत्यापन के लिए रिपोर्ट का इंतजार है. एम्स भुवनेश्वर के अधिकारियों ने शनिवार को दिल्ली स्थित केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला को कम से कम 15 व्यक्तियों के डीएनए सैंपलिंग जांच रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र लिखा, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य पिछले 15 दिनों से शव लेने के लिए अस्पताल के बाहर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
(अतिरिक्त इनपुट-एजेंसी)