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असम में मवेशी संरक्षण विधेयक पारित, जानें क्या हैं इसके प्रावधान - मवेशी संरक्षण विधेयक पारित किया

विपक्षी दलों के विरोध के बीच असम विधानसभा ने शुक्रवार को मवेशी संरक्षण विधेयक 2021 पारित कर दिया.

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Published : Aug 13, 2021, 8:45 PM IST

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को सदन में विधेयक पेश किया था, जो अब कानून बन गया है. विधेयक का उद्देश्य उन क्षेत्रों में मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करना और उन क्षेत्रों में गोमांस पर प्रतिबंध लगाना है, जहां के निवासी मुख्य रूप से गैर-बीफ खाने वाले समुदाय हैं. इसने मंदिरों और धार्मिक स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में मवेशियों के वध को भी प्रतिबंधित कर दिया.

कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और वाम दलों सहित विपक्षी दलों ने विधेयक का कड़ा विरोध किया और विधेयक में 75 संशोधनों का सुझाव दिया. हालांकि, विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि यह विधेयक राज्य के पशुपालकों और किसानों को काफी हद तक प्रभावित करेगा. इस विधेयक का असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इससे असम काे सालाना 20000 करोड़ रुपये का नुकसान हाेगा.

इस्लाम ने आगे कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के 5 किलोमीटर के दायरे में मवेशी वध पर प्रतिबंध स्वीकार्य नहीं हो सकता है और इस प्रावधान से पशु वध पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा.

इस्‍लाम ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि गाय लुप्तप्राय जानवर नहीं है कि जानवर के संरक्षण के उपाय होने चाहिए. इस तरह की सख्त कार्रवाई महिलाओं की सुरक्षा के लिए लागू की जानी चाहिए थी.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ बीजेपी ही पशु संरक्षण की बात नहीं कर रही है. महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए, सरमा ने कहा कि गांधीजी ने बहुत पहले कहा था कि सिर्फ धार्मिक भजनों का जाप करना और तिलक लगाना किसी को हिंदू के रूप में पहचान नहीं दिलाता है, गौ माता के प्रति सम्मान एक वास्तविक हिंदू के रूप में पहचान कराता है. सरमा ने कहा कि हम एक ऐसे देश से ताल्लुक रखते हैं जो 5000 साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है.

गौ माता का सम्मान करना और इसकी रक्षा करना इस सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है. उन्हाेंने कहा कि यह समझ से परे है कि इस बिल से कैसे राज्य काे सलाना 20000 करोड़ का नुकसान हाेगा. उन्होंने कहा कि असम की अर्थव्यवस्था पशु व्यापार पर निर्भर नहीं है. पशु तस्करी का एक अवैध बाजार है. विधेयक केवल इस अवैध पशु तस्करी को रोकेगा.

सरमा ने सदन के सदस्यों से पूछा कि आज हम हिंदू या मुसलमान बन गए हैं. उससे पहले हम क्या थे?

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को सदन में विधेयक पेश किया था, जो अब कानून बन गया है. विधेयक का उद्देश्य उन क्षेत्रों में मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करना और उन क्षेत्रों में गोमांस पर प्रतिबंध लगाना है, जहां के निवासी मुख्य रूप से गैर-बीफ खाने वाले समुदाय हैं. इसने मंदिरों और धार्मिक स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में मवेशियों के वध को भी प्रतिबंधित कर दिया.

कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और वाम दलों सहित विपक्षी दलों ने विधेयक का कड़ा विरोध किया और विधेयक में 75 संशोधनों का सुझाव दिया. हालांकि, विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि यह विधेयक राज्य के पशुपालकों और किसानों को काफी हद तक प्रभावित करेगा. इस विधेयक का असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इससे असम काे सालाना 20000 करोड़ रुपये का नुकसान हाेगा.

इस्लाम ने आगे कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के 5 किलोमीटर के दायरे में मवेशी वध पर प्रतिबंध स्वीकार्य नहीं हो सकता है और इस प्रावधान से पशु वध पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा.

इस्‍लाम ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि गाय लुप्तप्राय जानवर नहीं है कि जानवर के संरक्षण के उपाय होने चाहिए. इस तरह की सख्त कार्रवाई महिलाओं की सुरक्षा के लिए लागू की जानी चाहिए थी.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ बीजेपी ही पशु संरक्षण की बात नहीं कर रही है. महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए, सरमा ने कहा कि गांधीजी ने बहुत पहले कहा था कि सिर्फ धार्मिक भजनों का जाप करना और तिलक लगाना किसी को हिंदू के रूप में पहचान नहीं दिलाता है, गौ माता के प्रति सम्मान एक वास्तविक हिंदू के रूप में पहचान कराता है. सरमा ने कहा कि हम एक ऐसे देश से ताल्लुक रखते हैं जो 5000 साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है.

गौ माता का सम्मान करना और इसकी रक्षा करना इस सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है. उन्हाेंने कहा कि यह समझ से परे है कि इस बिल से कैसे राज्य काे सलाना 20000 करोड़ का नुकसान हाेगा. उन्होंने कहा कि असम की अर्थव्यवस्था पशु व्यापार पर निर्भर नहीं है. पशु तस्करी का एक अवैध बाजार है. विधेयक केवल इस अवैध पशु तस्करी को रोकेगा.

सरमा ने सदन के सदस्यों से पूछा कि आज हम हिंदू या मुसलमान बन गए हैं. उससे पहले हम क्या थे?

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