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संकट में सरोवर: अस्तित्व खो रहे कई तालाब, सुध नहीं ले रहा प्रशासन - पर्यावरण, नदी और तालाब

रायगढ़ शहर में छोटे-बड़े 12 से भी अधिक तालाब हैं, जो कभी लोगों के गुज बसर करने का सहारा थे. अब हालात ये हैं कि तालाब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. लोगों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया है.

Water hyacinth in the ponds of Raigarh
अस्तित्व खो रहे तालाब
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Published : Feb 12, 2020, 8:27 PM IST

रायगढ़: शहर में छोटे बड़े 12 से भी अधिक तालाब हैं, जिनमें से ज्यादातर की हालत दयनीय है. कभी इन तालाबों से शहरवासी अपनी गुजर बसर करते थे, लेकिन आज इनमें गंदगी का अंबार है. प्रशासन के उदासीन रवैये की वजह से शहर के तालाबों में जलकुंभी पसरी हुई है, पानी नजर ही नहीं आता. इस तरह कई तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं.

अस्तित्व खो रहे कई तालाब

प्रशासन की अनदेखी की वजह से तालाबों में गंदगी पसरी हुई है. पानी कम होने की वजह से लोग इस्तेमाल भी नहीं कर सकते हैं, जिससे धीरे-धीरे कभी शहर की पहचान रहे ये तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं.

प्रशासन का सौतेला व्यवहार

वहीं पर्यावरण, नदी और तालाब के संरक्षण के लिए काम करने वाले बताते हैं कि रायगढ़ शहर में मूलभूत सुविधाओं के काम के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रशासन के सौतेले व्यवहार की वजह से आज तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं.

मात्र गिनती के बचे हैं तालाब

बता दें कि रायगढ़ औद्योगिक जिले के रूप में विकसित हो रहा है, उद्योगों के साथ शहर में लोगों का दबाव भी बढ़ रहा है. इसी दबाव के कारण नहर और तालाब को पाट कर अवैध कॉलोनियां तैयार की जा रही हैं, जिस वजह से आज शहर में गिनती मात्र के तालाब बचे हुए हैं. ये लापरवाही जिम्मेदारों पर बड़े सवाल खड़े करती है.


रायगढ़: शहर में छोटे बड़े 12 से भी अधिक तालाब हैं, जिनमें से ज्यादातर की हालत दयनीय है. कभी इन तालाबों से शहरवासी अपनी गुजर बसर करते थे, लेकिन आज इनमें गंदगी का अंबार है. प्रशासन के उदासीन रवैये की वजह से शहर के तालाबों में जलकुंभी पसरी हुई है, पानी नजर ही नहीं आता. इस तरह कई तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं.

अस्तित्व खो रहे कई तालाब

प्रशासन की अनदेखी की वजह से तालाबों में गंदगी पसरी हुई है. पानी कम होने की वजह से लोग इस्तेमाल भी नहीं कर सकते हैं, जिससे धीरे-धीरे कभी शहर की पहचान रहे ये तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं.

प्रशासन का सौतेला व्यवहार

वहीं पर्यावरण, नदी और तालाब के संरक्षण के लिए काम करने वाले बताते हैं कि रायगढ़ शहर में मूलभूत सुविधाओं के काम के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रशासन के सौतेले व्यवहार की वजह से आज तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं.

मात्र गिनती के बचे हैं तालाब

बता दें कि रायगढ़ औद्योगिक जिले के रूप में विकसित हो रहा है, उद्योगों के साथ शहर में लोगों का दबाव भी बढ़ रहा है. इसी दबाव के कारण नहर और तालाब को पाट कर अवैध कॉलोनियां तैयार की जा रही हैं, जिस वजह से आज शहर में गिनती मात्र के तालाब बचे हुए हैं. ये लापरवाही जिम्मेदारों पर बड़े सवाल खड़े करती है.


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