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न्याय की आस में गैंगरेप पीड़िता ने दे दी थी जान, 5 साल बाद मिला इंसाफ - durg gangrape story

दुर्ग अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो पुलिसकर्मियों और डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

5 साल बाद गैंगरेप पीड़िता को मिला इंसाफ
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Published : Nov 22, 2019, 2:11 PM IST

दुर्ग: इंसाफ की आस में जान देने वाली गैंगरेप पीड़िता को 5 साल बाद न्याय के मंदिर से न्याय मिला. दुर्ग अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो पुलिसकर्मियों और डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

5 साल बाद गैंगरेप पीड़िता को मिला इंसाफ

पीड़िता 18 जून साल 2014 की रात सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल इलाज के लिए पहुंची थी. जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर गौतम पंडित ने नशे का इंजेक्शन देकर उससे दुष्कर्म किया. उसके बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मी सौरभ भक्ता ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर साथी चंद्रप्रकाश पांडेय के साथ मिलकर कई बार पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया. लड़की गर्भवती हुई तो सौरभ भक्ता ने उसका अबॉर्शन कराया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर परिवारवालों को इसकी जानकारी हुई, तब कहीं जाकर तीनों के खिलाफ केस दर्ज हुआ.

कोर्ट में डेढ़ साल तक सुनवाई चलती रही लेकिन पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला, जिससे दुखी होकर उसने आत्महत्या कर ली थी. साथ ही उसने एक सुसाइड पत्र में अपने साथ हुई न्यायालयीन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए तीनों आरोपियों के कारण आत्महत्या करने का जिक्र किया था. 5 साल बाद अदालत से उसे इंसाफ मिला. वो जहां भी होगी शायद उसे सुकून मिला होगा.

दुर्ग: इंसाफ की आस में जान देने वाली गैंगरेप पीड़िता को 5 साल बाद न्याय के मंदिर से न्याय मिला. दुर्ग अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो पुलिसकर्मियों और डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

5 साल बाद गैंगरेप पीड़िता को मिला इंसाफ

पीड़िता 18 जून साल 2014 की रात सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल इलाज के लिए पहुंची थी. जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर गौतम पंडित ने नशे का इंजेक्शन देकर उससे दुष्कर्म किया. उसके बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मी सौरभ भक्ता ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर साथी चंद्रप्रकाश पांडेय के साथ मिलकर कई बार पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया. लड़की गर्भवती हुई तो सौरभ भक्ता ने उसका अबॉर्शन कराया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर परिवारवालों को इसकी जानकारी हुई, तब कहीं जाकर तीनों के खिलाफ केस दर्ज हुआ.

कोर्ट में डेढ़ साल तक सुनवाई चलती रही लेकिन पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला, जिससे दुखी होकर उसने आत्महत्या कर ली थी. साथ ही उसने एक सुसाइड पत्र में अपने साथ हुई न्यायालयीन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए तीनों आरोपियों के कारण आत्महत्या करने का जिक्र किया था. 5 साल बाद अदालत से उसे इंसाफ मिला. वो जहां भी होगी शायद उसे सुकून मिला होगा.

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