रायगढ़: कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों की जिंदगी में काफी बदलाव आया है. लोग पहले से ज्यादा साफ-सफाई का ध्यान रखने लगे हैं. रायगढ़ जिले में भी इस महामारी का प्रकोप है, लेकिन यहां के छोटे-बड़े 2 दर्जन से ज्यादा अस्पताल और निजी क्लीनिक इससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. अस्पतालों में साफ-सफाई से लेकर वायरस से बचने के तमाम जतन किए जा रहे हैं. महामारी के बाद से ही इन जगहों पर सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं. क्लीनिक की सफाई पहले के मुकाबले ज्यादा की जाने लगी है. जो मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं, उनकी थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद सैनिटाइजर दिया जाता है. मरीजों के साथ उनके परिजनों का भी रिकॉर्ड लिया जा रहा है.
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संक्रमण के डर से लोग भी पूरी सतर्कता के साथ अस्पताल पहुंचते हैं. अस्पताल में आने वाले सभी मरीज और उनके परिजन बिना मास्क के अस्पताल में नहीं आते हैं. रायगढ़ जिले के अलावा सीमावर्ती राज्य ओडिशा, झारखंड और बिहार के लोग भी जिले के अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन में निजी क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटरों को बंद कर दिया गया था. अनलॉक वन के साथ ही इन निजी क्लीनिक और अस्पतालों में सशर्त मरीजों के इलाज की अनुमति मिली. ETV भारत ने ऐसे ही कुछ क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर का जायजा लिया.
लोगों की बदली हैं आदतें
इस महामारी के समय डॉक्टर्स अहम भूमिका निभा रहे हैं. कोरोना संक्रमितों के साथ ही आम लोगों का इलाज डॉक्टर पूरी सावधानी के साथ कर रहे हैं. शहर के डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक डॉक्टर आलोक केडिया के मुताबिक लोगों ने संक्रमण के खतरे को देखते हुए अपनी आदतें बदली हैं. पहले की तरह अब कोई मरीज अस्पताल नहीं जाता है. सभी पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ अस्पताल पहुंचते हैं.
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पहले ही दिया जाता है समय
हड्डी रोग विभाग के विशेषज्ञ और निजी अस्पताल संचालक डॉक्टक प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए वेटिंग एरिया में कुर्सियां बढ़ा दी गई हैं, साथ ही मरीज के साथ कम से कम परिजनों को भीतर आने की अनुमति दी जाती है. डॉक्टर के परामर्श के लिए टोकन के साथ टाइमिंग बताकर बुलाया जाता है. मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री जानने के बाद उनका इलाज किया जाता है.
अस्पताल में ली जाती है डिटेल
क्लीनिक में जाने पर सबसे पहले मरीज और उनके परिजनों से फॉर्म भराया जाता है. इसमें उनकी ट्रैवल हिस्ट्री लिखी होती है. एक मरीज ने बताया कि पहले अस्पताल में बहुत भीड़ होती थी, लेकिन अब कोरोना संक्रमण के डर से लोगों ने आना कम कर दिया है. अस्पताल में कुर्सियां सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से लगाई गई है. इस वजह से लोग दूर-दूर बैठते हैं. सभी अस्पतालों में सबसे पहले आने वाले हर व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है. इसके बाद सैनिटाइजर दिया जाता है. प्रदेश में डॉक्टरों के साथ ही आम लोग भी पूरी सावधानी बरत रहे हैं. बिना मास्क के लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं.