सीतामढ़ी: शिवहर जिले के अदौरी और खोरीपाकर गांव के बीच पुल निर्माण की मांग को लेकर वर्षो से सत्याग्रह और आंदोलन जारी है. पुल नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी होती है, इसके लिए शिवहर के अदौरी गांव निवासी संजय सिंह पिछले कई वर्षों से आंदोलन चला रहे हैं. लेकिन अब तक राजनेताओं का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है.
अपने आंदोलन की अगली कड़ी में युवा इंजीनियर ने अब हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है. जो सीतामढ़ी और शिवहर जिले में युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है. इस दोनों जिलों के बाद मोतिहारी में यह अभियान चलाया जाएगा. संजय का कहना है कि अगर 2020 तक पुल नहीं बनाया गया, तो वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे और उस याचिका को दायर करने में यह हस्ताक्षर अभियान बड़ा ही कारगर साबित होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इस अभियान में दोनों जिलों के सैकड़ों लोग शामिल हैं.
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सांसद ने मांग को ठहराया उचित
सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू ने भी इस पुल निर्माण की मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि यह पुल सीतामढ़ी से मोतिहारी को जोड़ेगी. इसके बन जाने से तीन जिले के लोगों को लाभ मिलेगा. वहीं, सीतामढ़ी से मोतिहारी की दूरी 160 किलोमीटर से घटकर केवल 60 किलोमीटर रह जाएगी. मैं पुल निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले संजय सिंह की काफी सराहना करता हूं. जो हजारों लोगों के लिए हित की बात करते हुए अपनी मांग पर डटे हैं. अपनी मांग को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं. उनके इस अभियान में मेरा समर्थन उनके साथ है. इसके लिए चाहे सरकार से वार्ता करनी हो या पुल निगम से, मैं भरपूर प्रयास करूंगा, ताकि वह पुल जल्द से जल्द बनकर तैयार हो जाए.
छत्तीसगढ़ से पहुंचा शिवहर
पुल निर्माण की मांग करने वाले संजय सिंह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उनका काफी बड़ा कारोबार छत्तीसगढ़ में चल रहा था. लेकिन बाढ़ पीड़ित क्षेत्र होने के कारण उनके मन में बचपन से यह जिज्ञासा बनी हुई थी कि क्यों ना शिवहर जाकर इस पुल की मांग को सरकार के बीच रखा जाए. उन्हें उम्मीद थी कि सरकार जन समस्या पर जल्द विचार करेगी और बागमती और लल बकीया नदी पर पुल बनाया जाएगा. इससे इस क्षेत्र का विकास होगा.
पूल बनाने से फायदा
बता दें कि अदौरी गांव शिवहर जिले में आता है. वहीं, खोरीपाकर गांव मोतिहारी जिले में है. इस दोनों गांव के बीच से दो नदियां बागमती और लाल बकिया गुजरती है. इन दोनों गांव के बीच की दूरी करीब 3 किलोमीटर है. इस पुल के बन जाने से सीतामढ़ी का जानकी धाम और अयोध्या का संपर्क सीधा जुड़ जाएगा. साथ ही जानकी स्थान से बापूधाम मोतिहारी की दूरी भी कम हो जाएगी.