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आत्महत्या के मामलों में 2 घंटों के भीतर अस्पताल पहुंचने पर बच सकती जान, शोध में खुलासा - RESEARCH IN AIIMS GORAKHPUR

गोरखपुर AIIMS के मेडिसिन विभाग में आए 10 मामलों में हुए शोध में 100% सफलता मिली.

एम्स गोरखपुर
एम्स गोरखपुर (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : Feb 23, 2025, 7:52 AM IST

गोरखपुर : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर के डॉक्टरों ने ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में अब तक आए 10 हैंगिंग (फांसी) के मामलों में हुए शोध में 100% सफलता प्राप्त कर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. इस उपलब्धि पर आधारित शोध पत्र हाल ही में एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है. एम्स की तरफ से जारी विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया है कि अध्ययन में चार मामलों का विश्लेषण किया गया. जिनमें से तीन आत्महत्या के प्रयास और आकस्मिक हैंगिंग (Accidental Hanging) का मामला था. आकस्मिक मामले में महिला का दुपट्टा गेहूं पीसने वाली मशीन में फंस गया था. जिससे वह गला घुटने के कारण बेहोश हो गई. सभी मरीजों के इलाज में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डाॅ. अरविन्द, डॉ. सुहास, डॉ. अरुण, डॉ. राहुल, डॉ. श्रीश्रा एवं डाॅ. नागास्वामी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.




शोध के अनुसार सभी मरीजों को अस्पताल तक एक से दो घंटे के भीतर पहुंचा दिया गया जिससे उनके बचने की संभावना अत्यधिक बढ़ गई. टीम ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उन्नत जीवन रक्षक उपाय (Advanced Life Support) अपनाए जिससे सभी मरीजों की जान बचाई जा सकी. हैंगिंग के मामलों में मरीज के गले और गर्दन पर गंभीर चोटें आती हैं जिससे सांस की नली में ट्यूब डालना (Intubation) बेहद कठिन हो जाता है. अक्सर इन मामलों में गर्दन की हड्डी (Cervical Spine) में फ्रैक्चर हो जाता है. जिससे श्वसन नली में ट्यूब डालना चुनौतीपूर्ण बन जाता है. इसके बावजूद AIIMS गोरखपुर की टीम ने कुशल तकनीकों का उपयोग कर सभी मरीजों का सफलतापूर्वक इंटुबेशन किया और समय पर ऑक्सीजन देकर मस्तिष्क को स्थायी क्षति से बचा लिया.




कोई न्यूरोलॉजिकल जटिलता नहीं: फॉलो-अप में पाया गया कि सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ थे और किसी को भी कोई स्थायी न्यूरोलॉजिकल (Neurological) जटिलता नहीं हुई. यह इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर इंटुबेशन और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से मस्तिष्क की अपरिवर्तनीय क्षति को रोका जा सकता है. हैंगिंग से बचे मरीजों के उपचार पर अब तक चिकित्सा साहित्य (Medical Literature) में बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध थी. इस शोध के प्रकाशन से इस विषय पर एक नया दृष्टिकोण मिला है, जो अन्य अस्पतालों और चिकित्सकों को ऐसे मामलों में जीवनरक्षक कदम उठाने में मदद करेगा.

AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक (ED) मेजर जनरल डॉ. प्रोफेसर विभा दत्ता ने इस असाधारण उपलब्धि के लिए ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह सफलता AIIMS गोरखपुर की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं को दर्शाती है और हमारी मेडिकल टीम की तत्परता और दक्षता का प्रमाण है. इस शोध से पूरे चिकित्सा जगत को लाभ मिलेगा. AIIMS गोरखपुर की यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित कर रही है और भविष्य में हैंगिंग के मामलों में और अधिक प्रभावी उपचार रणनीतियां विकसित करने की प्रेरणा दे रही है.

यह भी पढ़ें : चेहरे पर काले-भूरे धब्बे क्याें होते हैं? AIIMS गोरखपुर ने ढूंढा कारण और सटीक इलाज, आप भी जानें - AIIMS GORAKHPUR

यह भी पढ़ें : गंजेपन से परेशान हैं तो गोरखपुर एम्स आइए, फॉलिकुलर ग्राफ्टिंग टेक्नोलॉजी से कभी नहीं गिरेंगे बाल - एम्स गोरखपुर में हेयर ट्रांसप्लांट

गोरखपुर : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर के डॉक्टरों ने ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में अब तक आए 10 हैंगिंग (फांसी) के मामलों में हुए शोध में 100% सफलता प्राप्त कर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. इस उपलब्धि पर आधारित शोध पत्र हाल ही में एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है. एम्स की तरफ से जारी विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया है कि अध्ययन में चार मामलों का विश्लेषण किया गया. जिनमें से तीन आत्महत्या के प्रयास और आकस्मिक हैंगिंग (Accidental Hanging) का मामला था. आकस्मिक मामले में महिला का दुपट्टा गेहूं पीसने वाली मशीन में फंस गया था. जिससे वह गला घुटने के कारण बेहोश हो गई. सभी मरीजों के इलाज में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डाॅ. अरविन्द, डॉ. सुहास, डॉ. अरुण, डॉ. राहुल, डॉ. श्रीश्रा एवं डाॅ. नागास्वामी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.




शोध के अनुसार सभी मरीजों को अस्पताल तक एक से दो घंटे के भीतर पहुंचा दिया गया जिससे उनके बचने की संभावना अत्यधिक बढ़ गई. टीम ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उन्नत जीवन रक्षक उपाय (Advanced Life Support) अपनाए जिससे सभी मरीजों की जान बचाई जा सकी. हैंगिंग के मामलों में मरीज के गले और गर्दन पर गंभीर चोटें आती हैं जिससे सांस की नली में ट्यूब डालना (Intubation) बेहद कठिन हो जाता है. अक्सर इन मामलों में गर्दन की हड्डी (Cervical Spine) में फ्रैक्चर हो जाता है. जिससे श्वसन नली में ट्यूब डालना चुनौतीपूर्ण बन जाता है. इसके बावजूद AIIMS गोरखपुर की टीम ने कुशल तकनीकों का उपयोग कर सभी मरीजों का सफलतापूर्वक इंटुबेशन किया और समय पर ऑक्सीजन देकर मस्तिष्क को स्थायी क्षति से बचा लिया.




कोई न्यूरोलॉजिकल जटिलता नहीं: फॉलो-अप में पाया गया कि सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ थे और किसी को भी कोई स्थायी न्यूरोलॉजिकल (Neurological) जटिलता नहीं हुई. यह इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर इंटुबेशन और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से मस्तिष्क की अपरिवर्तनीय क्षति को रोका जा सकता है. हैंगिंग से बचे मरीजों के उपचार पर अब तक चिकित्सा साहित्य (Medical Literature) में बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध थी. इस शोध के प्रकाशन से इस विषय पर एक नया दृष्टिकोण मिला है, जो अन्य अस्पतालों और चिकित्सकों को ऐसे मामलों में जीवनरक्षक कदम उठाने में मदद करेगा.

AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक (ED) मेजर जनरल डॉ. प्रोफेसर विभा दत्ता ने इस असाधारण उपलब्धि के लिए ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह सफलता AIIMS गोरखपुर की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं को दर्शाती है और हमारी मेडिकल टीम की तत्परता और दक्षता का प्रमाण है. इस शोध से पूरे चिकित्सा जगत को लाभ मिलेगा. AIIMS गोरखपुर की यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित कर रही है और भविष्य में हैंगिंग के मामलों में और अधिक प्रभावी उपचार रणनीतियां विकसित करने की प्रेरणा दे रही है.

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