नई दिल्ली: आने वाले समय में दिल्ली के लोगों को सार्वजनिक परिवहन बेड़े में चलने वाली डीटीसी और क्लस्टर स्कीम की ऑरेज बसों की किल्लत झेलनी पड़ सकती है. दरअसल, क्लस्टर स्कीम की करीब 976 बस की परिचालन अवधि समाप्त हो रही है, जिसके चलते संभवत: 19 जून को यह रोड से हट जाएंगी. अब इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर के साथ-साथ डिपो में कार्यरत हजारों की संख्या में कर्मचारियों को बेरोजगार होने का डर सता रहा है. इसके चलते वो अब अपने रोजगार को लेकर हड़ताल कर रहे हैं.
सरकार पर लगाया आरोप: यूनियन का आरोप है कि केजरीवाल सरकार धीरे-धीरे सभी सरकारी महकमों को प्राइवेट करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. युवाओं को बेरोजगार करने के लिए नई-नई नीतियां अपनाई जा रही हैं. पहले डीटीसी बसों की संख्या को कम करके क्लस्टर स्कीम को लाया गया था. अब क्लस्टर स्कीम को लाने के बाद ड्राइवर कंडक्टर की भर्ती प्राइवेट पर्सन के तौर पर की गई, जबकि स्कीम लाने के दौरान बताया गया था कि दिल्ली में 60 फीसदी क्लस्टर बस होंगी और 40 फीसदी डीटीसी की बस होंगी.
डीटीसी को खत्म करने की साजिश: यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा कि क्लस्टर स्कीम को डीटीसी को खत्म करने के लिए लाया गया था. अब डीटीसी और क्लस्टर के अलावा इलेक्ट्रिक बसों को लाया गया, जिनका संचालन परिवहन विभाग की ओर से किया जा रहा है. इन इलेक्ट्रिक बसों में ड्राइवर प्राइवेट तो कंडक्टर डीटीसी के लगाए गए हैं. इस तरह के कदम उठाने से डीटीसी के ड्राइवर बेरोजगार किेए जा रहे हैं. इलेक्ट्रिक बसों के डिपो में कंडक्टर के अलावा डीटीसी का कोई भी कर्मचारी नहीं लगाया गया है. इन बसों पर डीटीसी के अनुभवी ड्राइवरों की जगह पर प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के ड्राइवर भर्ती किए जा रहे हैं. इस तरह से डीटीसी को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रची जा रही है.
बंद होने जा रहे डिपो: डीटीसी कर्मचारी यूनियन का कहना है कि एक तरफ केजरीवाल सरकार हर आम आदमी के साथ खड़े होने की बात करती है. वहीं दूसरी तरफ लोगों को बेरोजगार किया जा रहा है. रोजगार का खुले तौर पर मजाक बनाया जा रहा है. आरोप है कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में डीटीसी के डिपो बंद होने जा रहे हैं, जिसके बाद डीटीसी की 2800 बसें भी अपनी अवधि पूरी करने के चलते सड़क से हट जाएंगी. इससे जहां बेरोजगारों की संख्या बढ़ेगी, वहीं, आम लोगों को बसों की किल्लत भी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि सरकार और इलेक्ट्रिक बसें लाने की तैयारी कर रही है.
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युवाओं को बेरोजगार किया जा रहा: यूनियन ने आरोप लगाया कि क्लस्टर की ऑरेंज बसें बंद हो रही, जिसको पूरी तरह से 19 जून तक बंद कर दिया जाएगा. इन 976 बसों के माध्यम से कई हजार कर्मचारी कार्यरत थे, जिनको तत्काल प्रभाव से बेरोजगार कर दिया जाएगा. इसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग की है. इस तरह से युवाओं को बेरोजगार किया जा रहा है. इन सभी सात डिपो में ओखला (तेहखंड गांव) डिपो, राजघाट डिपो, दिलशाद गार्डन डिपो, सीमापुरी डिपो, बंदा बहादुर मार्ग डिपो, कैर डिपो और दिचाऊं कलां डिपो शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि डीटीसी के ड्राइवरों के बेरोजगार होने के साथ-साथ क्लस्टर के ड्राइवर, कंडक्टर, वर्कशॉप और अधिकारी भी आने वाली 19 जून को बेरोजगार कर दिए जाएंगे. क्लस्टर बसों के सभी कर्मचारी अब हड़ताल कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं यूनियन के महामंत्री मनोज शर्मा ने कहा कि युवाओं को बेरोजगार होने से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे. यूनियन डीटीसी के कंडक्टर, ड्राइवर, सफाईकर्मी और क्लस्टर बसों के ड्राइवर, कंडक्टर, वर्कशॉप के कर्मचारियों का रोजगार बचाने के लिए पूरी तरह से साथ है.
रोजी रोटी पर गहराया संकट: सीमापुरी डिपो पर हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे शहजाद अहमद ने बताया कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वो सभी परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के घर का घेराव करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे परिवार पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया है. साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो वे आम आदमी पार्टी को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में वोट नहीं देंगे. आने वाले समय में वे सड़कों पर भी उतर कर विरोध करेंगे. सभी डिपो में हमें कर्मचारियों का पूरा सहयोग मिल रहा है.
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हमारे साथ भेदभाव क्यों: वहीं उनके साथ हड़ताल पर बैठे बुद्ध प्रकाश ने कहा कि दिल्ली सरकार इसे छह माह इसको बढ़ाने की बात कह रही है. लेकिन समस्या यह है कि वो इसके बाद कहां जाएंगे. दिल्ली सरकार की ओर से क्लस्टर बसों के ड्राइवर व कंडक्टर को इलेक्ट्रिक बसों में काम पर नहीं रखा जा रहा है. हमने लंबे समय तक क्लस्टर बसों में रहकर दिल्ली की सेवा की है और कोरोना काल में भी हम पीछे नहीं रहे. फिर उनके साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है.
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