कुल्लू: इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर कुल्लू जिला के करीब 80 प्रतिशत से अधिक मंदिरों में भांग का घोटा नहीं बनाया गया. इस कारण भोलेनाथ के भक्तों को भगवान शिव का प्रसाद पीने का अवसर नहीं मिला. हालांकि, शाम तक युवा विभिन्न मंदिरों की दौड़ लगाते रहे. युवाओं को उम्मीद थी कि यहां पर उन्हें भांग से बना घोटा मिलेगा, लेकिन नशे के बढ़ते प्रचलन को रोकने के उद्देश्य से मंदिर कमेटियों ने इस बार भांग का घोटा तैयार नहीं किया.
नशे के बढ़ते प्रचलन को लेकर मंदिर कमेटियों ने लिया फैसला
महाशिवरात्रि से कुछ दिन पहले, जिले की मंदिर कमेटियों ने यह निर्णय लिया था कि इन दिनों युवाओं में नशे का प्रचलन बढ़ता जा रहा है इसलिए शिवरात्रि के अवसर पर भांग से तैयार होने वाला घोटा नहीं बनाया जाएगा. नशे को रोकने के लिए देव समाज भी अब सक्रिय हो गया है और जनता के बीच भी इस फैसले की सराहना हो रही है.
गौरतलब है कि जिला कुल्लू के विभिन्न मंदिरों में शिवरात्रि के अवसर पर पारंपरिक रूप से भांग से घोटा तैयार किया जाता था, जिसे भोलेनाथ का प्रसाद मानकर लोग इसका सेवन करते थे. इस साल युवाओं में चिट्टे के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए, मंदिर कमेटियों ने भांग से बने घोटे पर भी प्रतिबंध लगाया है.
मंदिर कमेटियों ने किया था खीर और फल का प्रबंध
जिला कुल्लू देवी देवता कारदार संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं सियाली महादेव के कारदार जयचंद ठाकुर ने बताया, "मंदिर कमेटी ने इस साल घोटा न बनाने का निर्णय लिया था और स्थानीय लोग भी इस निर्णय पर सहमत थे. इसके अलावा, जिला कुल्लू के अन्य मंदिरों ने भी इस तरह का निर्णय लिया गया था. इस बार मंदिर कमेटियों ने प्रसाद के रूप में केवल फल और खीर का प्रबंध किया था."
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