कोरबा:जिले मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर पाली का शिव मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है. जिसके संबंध में उपलब्ध प्रमाण के अनुसार इस एतिहासिक शिव मंदिर का निर्माण 1200 साल पहले हुआ था. पाली का शिव मंदिर एक प्राचीन धरोहर की तरह है, जो संरक्षित स्मारक भी है. इसी मंदिर के पास ही हार साल महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रशासन की तरफ से पाली महोत्सव का आयोजन किया जाता है.
पाली महोत्सव, इस प्राचीन धरोहर को सेलिब्रेट करने के साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक खास मंच भी है. रायगढ़ के मशहूर चक्रधर समारोह के तर्ज पर अब हर साल पाली महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है. जहां छत्तीसगढ़ के कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच मिलता है. छत्तीसगढ़ के संस्कृति की थीम पर पाली महोत्सव के मंच को सजाया जाता है. अब यहां देश के मशहूर कलाकारों को भी बुलाया जाने लगा है.
महाशिवरात्रि पर पाली महोत्सव (ETV Bharat Chhattisgarh)
पाली के शिव मंदिर में सिमटा छत्तीसगढ़ की समृद्ध इतिहास और संस्कृति:पाली का शिव मंदिर, यहां के शिव भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है. लोगों का मानना है कि यहां आने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
एक किवदंती के अनुसार मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं. शिवमंदिर के स्थापत्यकला के अनुसार, गर्भगृह में सिर्फ एक ही शिवलिंग होना चाहिए. ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्राचीन काल में युद्ध के समय दो मंदिर नष्ट हो गए होंगे. इसी वजह से तीन शिवलिंग एक ही मंदिर के गर्भगृह में रखा गया है. करीब 1200 साल पहले 9वीं शताब्दी में बाणवंशीय राजा विक्रमादित्य ने प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण करायाथा. यह राजा विक्रमादित्य की पूजा स्थली थी. पत्थर पर उकेरी गई मूर्तियों का आर्किटेक्चर अबु पहाड़ियों के जय मंदिरों, सोहगपुर और खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर जैसा भी है. 9वीं शताब्दी में बाणवंशीय राजा विक्रमादित्य ने इसका निर्माण कराया. जबकि 11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के शासक जाज्वल्य देव प्रथम ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.
आस्था और पुरातत्व दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है पाली महोत्सव :पुरातत्व के जानकार और जिले के पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्रि कहते हैं कि पाली का शिव मंदिर आस्था की दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही पुरातत्व के लिहाज से भी जिज्ञासा का केन्द्र है. मंदिर के अष्टकोणीय मण्डप पर ब्रम्ह्मा, श्रीकृष्ण, माता सरस्वती, महिषासुर मर्दिनी और गजलक्ष्मी का अंकन किया गया है. पाली के शिव मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर चिन्हित किया गया है. ऐसे प्राचीन धरोहर को सहेजने, इनका महत्व समझने के लिए पाली महोत्सव जैसे आयोजन बहुत जरूरी हो जाते हैं. आने वाले पीढ़ी को सभ्यता, संस्कृति का ज्ञान मिलता है. इसलिए ऐसी स्मारकें और ऐसे स्थान जो हमारी समृद्ध परंपरा और सभ्यता को दर्शाते हैं. इन्हें सहजने की जरूरत है. पाली महोत्सव के मंच से सांस्कृति कार्यक्रमों और कलाकृतियों के जरिए छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है.
हर साल पाली महोत्सव का आयोजन :महाशिवरात्रि पर हर साल जिला प्रशासन की तरफ से प्राचीन शिव मंदिर के पास पाली महोत्सव का आयोजन कराया जाता है. इसमें राज्य और राज्य के बाहर से भी कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है. पाली महोत्सव में स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है जो छत्तीसगढ़ के लोक परंपरा, लोक गायन और लोक नृत्य से जुड़ी कला का मंचन करते हैं. बीते कुछ सालों से रायगढ़ के चक्रधर महोत्सव के तर्ज पर इसका आयोजन किया जा रहा है. पाली महोत्सव भी राज्य में अब काफी प्रचलित है.
मैथिली ठाकुर और शान इस वर्ष के खास आकर्षण: इस वर्ष भी पाली महोत्सव के लिए प्रशासन ने खास तैयारी की है. छत्तीसगढ़ी की सांस्कृतिक थीम पर मंच सजाया गया है. छत्तीसगढ़ के नामचीन स्थानीय कलाकारों के साथ बिहार की मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर और बॉलीवुड सिंगर शान, पाली महोत्सव में शिरकत करेंगे.
26 फरवरी को पाली महोत्सव का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन करेंगे. इस संबंध में कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि पाली महोत्सव का आयोजन हर साल हो रहा है. इस वर्ष में दो दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भी आएंगे. पाली में ऐतिहासिक विरासत के तौर पर मौजूद प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है. इसके अलावा लोगों की भावनाएं इस महोत्सव से जुड़ी हुई है.