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रायपुर में डॉग बाइट के 3 साल में 51 हजार से ज्यादा केस, छत्तीसगढ़ विधानसभा में दी गई जानकारी - CHHATTISGARH BUDGET SESSION

रायपुर में तीन साल में कुत्ते के काटने के 51,000 से अधिक मामले सामने आए.

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रायपुर में डॉग बाइट (ETV Bharat Chhattisgarh)

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : Feb 26, 2025, 2:13 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में पिछले तीन वर्षों में कुत्तों के काटने के 51,730 मामले दर्ज किए गए हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को सूचित किया. भाजपा विधायक सुनील सोनी के एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में, सीएम ने यह भी कहा कि रायपुर नगर निगम सीमा में एक डॉग शेल्टर का निर्माण किया जा रहा है.

सवाल में सोनी ने जानना चाहा कि रायपुर जिले (जिसमें राज्य की राजधानी रायपुर शहर भी शामिल है) में सड़कों पर आवारा मवेशियों के रखरखाव के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं. उन्होंने जिले में पिछले तीन वर्षों में कुत्तों के काटने के मामले भी जानने की कोशिश की और पूछा कि ऐसी घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है.

अपने जवाब में सीएम साय ने कहा कि तीन साल में कुत्तों के इंसानों को काटने के 51,730 मामले सामने आए. 2022-2023 में 13,042 मामले, 2023-2024 में 24,928 मामले और 2024-2025 (जनवरी तक) में 13,760 मामले सामने आए.

इसी तरह, तीन वर्षों में कुत्तों द्वारा जानवरों को काटने के 2,803 मामले दर्ज किए गए. 2022-2023 में 879 मामले, 2023-2024 में 986 मामले और 2024-2025 (जनवरी तक) में 938 मामले दर्ज हुए.

चूँकि सड़क के कुत्ते सड़कों पर रहते हैं, इसलिए उनके काटने की जिम्मेदारी निर्धारित करना संभव नहीं है. जवाब में आगे कहा गया, रायपुर नगर निगम में एक डॉग शेल्टर का निर्माण किया जा रहा है.

आवारा कुत्तों की संख्या को कम करने और कुत्तों के काटने की घटनाओं को संबोधित करने के लिए, स्थानीय प्राधिकरण, रायपुर नगर निगम, दैनिक आधार पर (पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत) सड़क कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण (एंटी-रेबीज) कर रहा है. साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसमें कहा गया है कि पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जाता है.

रायपुर जिले की सड़कों पर आवारा घूमने वाले मवेशियों को काउ कैचर्स द्वारा पकड़कर गौशालाओं, कांजी हाउसों और गौशालाओं में बने अतिरिक्त शेडों में रखा जाता है. गौशालाओं में चारे और पानी की व्यवस्था की जाती है और समय-समय पर पशु चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य जांच की जाती है.

सड़कों पर घूम रहे गाय-बैलों, जो यातायात में बाधा उत्पन्न करते हैं और दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, उनके रख-रखाव की व्यवस्था की जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार समय-समय पर समीक्षा करती है. इसमें कहा गया है कि इन आवारा जानवरों को शहरी निकायों में गाय पकड़ने वालों द्वारा पकड़ा जाता है और गौठानों (गौशालाओं), कांजी घरों और गौशालाओं (गाय आश्रयों) में बने अतिरिक्त शेडों में रखा जाता है. इसके अलावा इन आवारा पशुओं को रेडियम पट्टी बांधकर दुर्घटनाओं को रोकने का भी प्रयास किया जाता है.

(सोर्स पीटीआई )

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