पंचकूला: हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी के टिक्कर गांव में रिटायर्ड हेल्थ इंस्पेक्टर ने बीते 25 साल से अपने घर को जन सेवा के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को सौंपा हुआ है. टिक्कर ताल गांव से लेकर मोरनी, रायपुररानी, पंचकूला शहर और उनके पैतृक जिला भिवानी तक में हेल्थ इंस्पेक्टर स्वरूप सिंह को कुएं वाले डॉक्टर के नाम से जाना जाता है. स्वरूप सिंह ने अपने घर को हेल्थ सेंटर के रूप में उस दौर में बनाने का फैसला किया था, जब मोरनी, टिक्कर ताल तक पहुंचने के रास्ते कच्चे और काफी दुर्गम होते थे. अधिकांश क्षेत्र में जंगल हुआ करता था.
घर है आरोग्य मंदिर हेल्थ सेंटर: मोरनी के टिक्कर गांव में सेवारत हेल्थ इंस्पेक्टर स्वरूप सिंह को कोई 'कुएं वाला डॉक्टर' कहता है तो कोई 'स्वरूप बाऊजी' के नाम से पुकारता है. स्वरूप सिंह ने बताया कि अपने घर को 25 साल से 'आरोग्य मंदिर हेल्थ सेंटर' बनाने के पीछे उनका मकसद जनसेवा है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा से आज तक अपने घर को मोरनी टिक्कर हेल्थ सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने का किराया तक नहीं लिया.
1994 में कच्चा घर, दवाई भी साल में एक बार: हेल्थ इंस्पेक्टर स्वरूप सिंह ने बताया कि वर्ष 1994 में टिक्कर गांव में उनकी नौकरी लगी थी. उस दौरान वहां के रास्ते और घर भी कच्चे हुआ करते थे. हर जगह केवल जंगल और पहाड़ ही दिखाई देते थे. इतना ही नहीं वर्ष भर में दवाइयां भी केवल एक बार मिला करती थी. साधन-संसाधनों की भी काफी कमी थी. उन्होंने बताया कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के रोगियों को इलाज/दवाई के करीब 20-30 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता था.
खुद की कमाई से खरीदते रहे दवाइयां: हेल्थ इंस्पेक्टर स्वरूप सिंह ने बताया कि कई किलोमीटर दूर से इलाज के लिए पहुंचने वाले रोगियों की जांच तो वो कर लेते थे. लेकिन उस दौरान हेल्थ सेंटर में बुखार तक की दवाई उपलब्ध नहीं होती थी, जिससे उन्हें काफी मायूस होना पड़ता था. स्वरूप सिंह ने बताया कि उस दौर में उनका मासिक वेतन भी महज 2896 रुपये होता था, लेकिन रोगियों की पीड़ा से परेशान होकर वो अपनी जेब से हर महीने 300 से 500 रुपये की दवाइयां खरीद कर सेंटर में रखते थे. बताया कि जब भी उन्हें पता लगता कि कोई व्यक्ति पास के गांव रायपुर रानी जा रहा है, तो वह उसे रुपये देकर दवाइयां मंगवाते थे.
घर को बनाए हेल्थ सेंटर का नहीं लिया किराया: स्वरूप सिंह ने बताया कि मोरनी व टिक्कर ताल में दवाओं की सप्लाई वर्ष 2006-07 के बाद जाकर ठीक होनी शुरू हुई थी. लेकिन उससे पहले वर्ष 1999 में वहां अपना घर बनाने के समय ही उन्होंने हेल्थ सेंटर के लिए जगह दी थी. गांव और आसपास के कई लोग उन्हें घर को बनाए हेल्थ सेंटर के एवज में किराया लेने के लिए आवेदन करने को कहते थे. लोग उन्हें बताया करते थे कि आवेदन करने पर हेल्थ सेंटर के किराए के लिए बड़ी रकम मंजूर हो सकती है. लेकिन बकौल स्वरूप सिंह उन्होंने ऐसा करने का कभी नहीं सोचा और निस्वार्थ भाव से आज तक जनसेवा कर रहे हैं. उनके घर के कमरों में आज भी पहले की तरह हेल्थ सेंटर का संचालन हो रहा है