नक्सलियों की उप राजधानी जगरगुंडा में बोर्ड परीक्षा, केवल 36 छात्र के लिए हेलीकॉप्टर से भेजा प्रश्न पत्र - सुकमा
Board exams छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं के छात्रों का बोर्ड एग्जाम शुक्रवार शुरू होगा. एग्जाम को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग तैयारी में जुटी है. विभाग द्वारा सभी जिलों में प्रश्न पत्र पहुंचाया जा रहा है. शहरी और अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में तो आसानी से प्रश्न पत्र पहुंच रहे हैं, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र में प्रश्न पत्र पहुंचाना आसान नहीं. सुकमा के जगरगुंडा परीक्षा केंद्र में तो हेलीकॉप्टर की मदद से प्रश्न पत्र पहुंचाया गया है. Naxalites sub capital Jagargunda
जगरगुंडा में हेलीकॉप्टर से भेजा गया बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र
सुकमा:शिक्षा ग्रहण करके सुकमा की तस्वीर बदलने के सपनों को साकार करने नक्सलगढ़ के छात्र भी बोर्ड परीक्षा दिलाने के लिए तैयार हैं. सुकमा जिले में बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र कड़ी सुरक्षा के बीच 16 केंद्रों में से 15 केंद्रों में भेजा गया. लेकिन बचे 1 केंद्र तक पहुंचने के लिए जिला प्रशासन ने हेलीकॉप्टर की मदद ली है. प्रश्न पत्र को सुरक्षागत कारणों से केंद्राध्यक्ष के साथ हेलीकॉप्टर से जगरगुंडा भेजा गया है.
हेलीकॉप्टर से जगरगुंडा भेजा प्रश्न पत्र: सुकमा कलेक्टर हरीश एस ने बताया, "साल 2024 में होने वाले बोर्ड परीक्षा में पहली बार ऐसा हुआ कि सुकमा जिले में बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र वितरण का काम समन्वयक केंद्र हायर सेकंडरी स्कूल सुकमा से किया गया. इससे पहले के सालों में हुए बोर्ड परीक्षा में केंद्राध्यक्ष प्रश्न पत्र के लिए बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर जाते थे. इस साल सुकमा में होने से कार्य भी आसानी से सम्पन्न हुए हैं."
1 मार्च से शुरू होने वाले बोर्ड परीक्षा में सुकमा जिले में 16 परीक्षा केंद्र बनाया गया है, जिसमें 10वीं बोर्ड के लिए 1883 नियमित छात्र शामिल होंगे और 18 स्वाध्यायी छात्र भी हैं. इसके अलावा 12वीं बोर्ड एग्जाम में नियमित 1495 छात्र व स्वाध्यायी 33 छात्र शामिल होंगे. केवल जगरगुंडा में 10वीं-12वीं के केवल 36 छात्र हैं, जिनके लिए प्रश्न पत्र हेलीकॉप्टर से भेजा गया है. - हरीश एस, कलेक्टर, सुकमा
नक्सलियों की उप राजधानी है जगरगुंडा: आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ का बस्तर पिछले 4 दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहा है. सुकमा जिले के जगरगुंडा को नक्सलियों की उप राजधानी कहा जाता है. अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से क्षेत्र के सभी बच्चों को करीब 60 किलोमीटर का सफर कर परीक्षा के 4 दिन पहले दोरनापाल आना पड़ता था. परीक्षा सम्पन्न होने के बाद वापस छात्र लौट जाते थे. लेकिन कुछ सालों में लगातार सड़क निर्माण और सुरक्षाबलों के दबाव के चलते नक्सली बैक फुट पर हैं. जिसके चलते जिला प्रशासन ने इस साल जगरगुंडा में ही परीक्षा केंद्र खोला है. जिसमें हेलीकॉप्टर की मदद से प्रश्न पत्र पहुंचाया गया है.