नैनीताल: उत्तराखंड में सहायक अध्यापक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. नैनीताल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ की खंडपीठ ने सहायक अध्यापकों की नियुक्ति पर लगी रोक को हटा दिया है. वहीं, कोर्ट ने कहा है कि नियुक्तियों के आदेश कोर्ट के अधीन रहेंगे.
बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के द्वारा 2018 में नोटिफिकेशन जारी कर शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए बीएड के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य कर दिए थे. राज्य सरकार ने भी इस शर्त को नियमों में जोड़ लिया था. जिसके बाद तय किया गया कि नियुक्तियों में पहली प्राथमिकता डीएलएड के अभ्यर्थियों को दी जाएगी. डीएलएड अभ्यर्थियों के नहीं मिलने के बाद बीएड अभ्यर्थियों को मौका दिया जाएगा. टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) के अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी.
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शनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के द्वारा जारी इस आदेश को उधमसिंह नगर के रहने वाले राजीव राणा समेत अन्य लोगों ने इसे नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी नियुक्तियों पर अंतरिम आदेश तक रोक लगा दी थी.
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जिसके बाद आज मामले में सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ और न्यायाधीश रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति पर लगी रोक को हटा दिया है. जिससे सहायक अध्यापक बनने का सपना देख रहे सैकड़ों लोगों को बड़ी राहत मिली है.