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राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में किया शक्ति स्मारक का लोकार्पण - उत्तराखंड ताजा समाचार टुडे

उत्तराखंड के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह गुरुवार को नैनीताल पहुंचे. यहां उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में शक्ति स्मारक का लोकार्पण किया.

Governor Gurmeet Singh
राज्यपाल गुरमीत सिंह
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Published : Dec 16, 2021, 8:12 PM IST

नैनीताल: उत्तराखंड के राज्यपाल बनने के बाद रिटायर्ड ले. जनरल गुरमीत सिंह पहली बार नैनीताल पहुंचे. यहां उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में बने शक्ति स्मारक का लोकार्पण किया. इस दौरान उन्होंने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें नमन किया.

इसके बाद राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के सभागार में छात्रों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक सैनिक धाम के रूप में है. यहां का प्रत्येक परिवार में कोई न कोई देश सेवा के लिए समर्पित है. यह एक देश के लिए अच्छी पहल है. इस स्कूल में हर एक परिवार से एक सैनिक आते हैं, जिनके विजय की गाथाएं हमेशा सुनाई जाती रहेंगी.

पढ़ें- CM धामी का कांग्रेस पर तंज, 'कभी CDS रावत को कहते थे गली का गुंडा, आज वोट के लिए लगा रहे कटआउट'

उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर का दिन भारत विजय दिवस के रूप में मनाता है. इसी दिन 1971 में पाकिस्तान को भारत से करारी शिकस्त मिली थी. 16 दिसंबर 1971 को ढाका में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था. 13 दिन तक चले इस युद्ध में कई भारतीय जवान शहीद हुए थे. इस दिन को बांग्लादेश में बिजॉय डिबोस या बांग्लादेश मुक्ति दिवस भी कहा जाता है और यह पाकिस्तान से बांग्लादेश की आधिकारिक स्वतंत्रता का प्रतीक है.

नैनीताल: उत्तराखंड के राज्यपाल बनने के बाद रिटायर्ड ले. जनरल गुरमीत सिंह पहली बार नैनीताल पहुंचे. यहां उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में बने शक्ति स्मारक का लोकार्पण किया. इस दौरान उन्होंने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें नमन किया.

इसके बाद राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के सभागार में छात्रों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक सैनिक धाम के रूप में है. यहां का प्रत्येक परिवार में कोई न कोई देश सेवा के लिए समर्पित है. यह एक देश के लिए अच्छी पहल है. इस स्कूल में हर एक परिवार से एक सैनिक आते हैं, जिनके विजय की गाथाएं हमेशा सुनाई जाती रहेंगी.

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उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर का दिन भारत विजय दिवस के रूप में मनाता है. इसी दिन 1971 में पाकिस्तान को भारत से करारी शिकस्त मिली थी. 16 दिसंबर 1971 को ढाका में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था. 13 दिन तक चले इस युद्ध में कई भारतीय जवान शहीद हुए थे. इस दिन को बांग्लादेश में बिजॉय डिबोस या बांग्लादेश मुक्ति दिवस भी कहा जाता है और यह पाकिस्तान से बांग्लादेश की आधिकारिक स्वतंत्रता का प्रतीक है.

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