ETV Bharat / state

नैनीताल के बाजार में घूमकर  गांधी जी ने हरिजन उत्थान के लिए चंदा किया था एकत्र - नैनीताल न्यूज

कुमाऊं यात्रा से गांधी जी काफी प्रभावित हुए थे. पहली बार 14 जून 1929 को जब गांधी जी नैनीताल के टाकुला पहुंचने तो उन्होंने यहां महिलाओं को संबोधित किया था.

गांधी जयंति
author img

By

Published : Oct 1, 2019, 11:16 PM IST

Updated : Oct 1, 2019, 11:49 PM IST

नैनीताल: देश की आजादी में उत्तराखंड के नैनीताल का विशेष योगदान रहा. 1929 और 1931 में महात्मा गांधी कुमाऊं के दौरे पर आए थे. इस दौरान वो नैनीतात में भी रूके थे. उन्होंने नैनीताल के बाजारों में घूम कर हरिजन उत्थान के लिए चंदा एकत्र किया.

महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 14 जून 1929 को नैनीताल प्रवास पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने लोगों को देश की आजादी के लिए प्रेरित किया था. इसके बाद महात्मा गांधी भवाली, रानीखेत, अल्मोड़ा और बागेश्वर तक गए थे. उन्होंने लोगों को आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने के लिए उत्साहित भी किया था.

पढ़ें- ईटीवी भारत की ओर से देश के सर्वश्रेष्ठ गायकों ने बापू को दी संगीतमय श्रद्धांजलि

दूसरी बार 1931 में गांधी जी एक बार फिर नैनीताल आए थे. इस दौरान उन्होंने नैनीताल से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित टाकुला में स्थित गांधी आश्रम में प्रवास किया था. कुमाऊं यात्रा से गांधी जी काफी प्रभावित हुए थे. पहली बार 14 जून 1929 को जब गांधी जी नैनीताल के टाकुला पहुंचने तो उन्होंने यहां महिलाओं को संबोधित किया था. गांधी जी के भाषण से महिलाएं काफी प्रभावित हुई थी और उन्होंने आंदोलन के संचालन के लिए अपने आभूषणों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए दान में दे दिया थे. महिलाओं के इस कदम से अन्य लोग भी प्रभावित हुए थे. जिसका परिणाण यह हुआ कि कुमाऊं से भारी संख्या में लोग नमक सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ गए थे.

नैनीताल आए थे गांधी जी

पढ़ें- गांधी @ 150 : रामोजी ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव ने लॉन्च किया बापू का प्रिय भजन

महिलाओं के इस जोश को देखते हुए महात्मा गांधी ने दूसरे दिन नैनीताल की मॉल रोड और बाजार में पदयात्रा की. इस दौरान महिला और स्थानीय लोगों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम और हरिजन फंड के लिए अपने आभूषण तक गांधी जी को दान में दे दिए. ताकि देश की आजादी में भी उनका प्रतिभाग हो सके.

नैनीताल: देश की आजादी में उत्तराखंड के नैनीताल का विशेष योगदान रहा. 1929 और 1931 में महात्मा गांधी कुमाऊं के दौरे पर आए थे. इस दौरान वो नैनीतात में भी रूके थे. उन्होंने नैनीताल के बाजारों में घूम कर हरिजन उत्थान के लिए चंदा एकत्र किया.

महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 14 जून 1929 को नैनीताल प्रवास पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने लोगों को देश की आजादी के लिए प्रेरित किया था. इसके बाद महात्मा गांधी भवाली, रानीखेत, अल्मोड़ा और बागेश्वर तक गए थे. उन्होंने लोगों को आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने के लिए उत्साहित भी किया था.

पढ़ें- ईटीवी भारत की ओर से देश के सर्वश्रेष्ठ गायकों ने बापू को दी संगीतमय श्रद्धांजलि

दूसरी बार 1931 में गांधी जी एक बार फिर नैनीताल आए थे. इस दौरान उन्होंने नैनीताल से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित टाकुला में स्थित गांधी आश्रम में प्रवास किया था. कुमाऊं यात्रा से गांधी जी काफी प्रभावित हुए थे. पहली बार 14 जून 1929 को जब गांधी जी नैनीताल के टाकुला पहुंचने तो उन्होंने यहां महिलाओं को संबोधित किया था. गांधी जी के भाषण से महिलाएं काफी प्रभावित हुई थी और उन्होंने आंदोलन के संचालन के लिए अपने आभूषणों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए दान में दे दिया थे. महिलाओं के इस कदम से अन्य लोग भी प्रभावित हुए थे. जिसका परिणाण यह हुआ कि कुमाऊं से भारी संख्या में लोग नमक सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ गए थे.

नैनीताल आए थे गांधी जी

पढ़ें- गांधी @ 150 : रामोजी ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव ने लॉन्च किया बापू का प्रिय भजन

महिलाओं के इस जोश को देखते हुए महात्मा गांधी ने दूसरे दिन नैनीताल की मॉल रोड और बाजार में पदयात्रा की. इस दौरान महिला और स्थानीय लोगों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम और हरिजन फंड के लिए अपने आभूषण तक गांधी जी को दान में दे दिए. ताकि देश की आजादी में भी उनका प्रतिभाग हो सके.

Intro:Summry

देश की आजादी में उत्तराखंड खासकर कुमाऊं और नैनीताल का विशेष रहा योगदान।

Intro

देश की आजादी में उत्तराखंड और नैनीताल का विशेष योगदान रहा 1929 और 1931 में महात्मा गांधी कुमाऊ के दौरे पर रहे और इस दौरान महात्मा गांधी नैनीताल में पहुंचे और उन्होंने नैनीताल की बाजारों में घूम कर हरिजन उत्थान के लिए चंदा एकत्र किया।


Body:महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 15 जून 1929 को नैनीताल प्रवास पर पहुंचे और यहां उन्होंने लोगों को देश की आजादी के लिए प्रेरित किया इसके बाद महात्मा गांधी भवाली, रानीखेत, अल्मोड़ा और बागेश्वर तक पहुंचे और उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता के युद्ध में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने के लिए उत्साहित भी करा और महात्मा गांधी बागेश्वर से वापस दिल्ली होते हुए गुजरात चले गए, जिसके बाद महात्मा गांधी दूसरी बार 1931 में एक बार फिर नैनीताल पहुंचे इस दौरान उन्होंने नैनीताल से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित टाकुला स्थित गांधी आश्रम में प्रवास किया।


Conclusion:गांधी जी की कुमाऊ यात्रा के बाद गांधीजी से इतने प्रभावित हुए कि वह आजादी के इस युद्ध में पहले से और जोश से प्रतिभाग करने लगे, 14 जून 1929 को नैनीताल के ताकुला पहुंचने के बाद अगले दिन महात्मा गांधी ने महिलाओं को संबोधित किया जिससे महिलाएं खासा प्रभावित हुई और महिलाओं द्वारा आंदोलन के संचालन के लिए अपने आभूषणों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए दान में दे दिया महिलाओं के इस कदम से आम जनता भी प्रभावित हुई परिणाम स्वरूप कुमाऊ के लोगों कि नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
महिलाओं के इस जोस को देखते हुए महात्मा गांधी ने दूसरे दिन नैनीताल की मॉल रोड और बाजार में पदयात्रा की और इस दौरान महिला और स्थानीय लोगों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम और हरिजन फण्ड के लिए अपने आभूषण तक तत्काल महात्मा गांधी को दान में दे दिए ताकि देश की आजादी में भी उनका प्रतिभाग हो सके।

बाइट- राजीव लोचन साह गांधीजी के नजदीकी परिवारिक।
Last Updated : Oct 1, 2019, 11:49 PM IST
ETV Bharat Logo

Copyright © 2025 Ushodaya Enterprises Pvt. Ltd., All Rights Reserved.