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500 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर दिल्ली से अरेस्ट - उत्तराखंड के 500 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला

500 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले मामले में एक और गिरफ्तारी हुई है. एसआईटी ने हरिद्वार के पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. इससे पहले एसआईटी ने देहरादून के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह को गिरफ्तार किया था.

Scholarship Scam
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Published : Sep 4, 2021, 6:49 PM IST

हरिद्वार: बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने एक और गिरफ्तार की है. अब एसआईटी ने हरिद्वार के पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. एसआईटी से जुड़े 55 मुकदमों में अनुराग शंखधर का नाम है.

बता दें, समाज कल्याण विभाग ने अनुराग शंखधर को निलंबित किया हुआ है. इससे पहले भी शंखधर को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था. आरोपी को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर देहरादून कोर्ट में पेश किया जाएगा. अनुराग शंखधर उप परियोजना निदेशक के पद पर तैनात थे.

इससे पहले घोटाले में एसआईटी ने देहरादून के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार को गिरफ्तार किया था. राम अवतार सिंह के खिलाफ डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए सहारनपुर के एक इंस्टीट्यूट को फर्जी तरीके से करीब 27 लाख रुपये की छात्रवृत्ति जारी की थी. ये छात्रवृत्ति की इंस्टीट्यूट के मालिकों और अधिकारियों ने आपस में बांट ली.

हाईकोर्ट के आदेश पर दो SIT कर रही जांच: बता दें, साल 2011 से 17 तक उत्तराखंड में 500 करोड़ से अधिक का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया था. इस घोटाले में बंदरबांट का मामला इस रूप में सामने आया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों में निजी शिक्षण संस्थानों को बिना सत्यापन के समाज कल्याण अधिकारी द्वारा करोड़ों रुपए का छात्रवृत्ति धन आवंटित किया गया. अधिकतर जांच में यह बात सामने आई कि निजी शिक्षण संस्थानों ने बिना एडमिशन किए ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकार को गुमराह कर छात्रवृत्ति का धन गबन किया.

पढ़ें- 500 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: पूर्व समाज कल्याण अधिकारी रामअवतार अरेस्ट

इस गंभीर फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश में राज्य में 2 विशेष SIT जांच टीम का गठन किया गया था. एक SIT जो देहरादून और हरिद्वार में सबसे बड़े पैमाने में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही है. इसका नेतृत्व आईपीएस मंजूनाथ टीसी कर रहे हैं. वहीं, अन्य 11 जनपदों में हुई छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आईजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में दूसरे नंबर की SIT कर रही है.

अभी तक इस घोटाले में बड़े स्तर पर देहरादून और हरिद्वार स्थित निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा समाज कल्याण अधिकारियों की मिलीभगत सामने आयी है. जिसके चलते दोनों ही जनपदों के कई आरोपी शिक्षण संस्थानों के संचालक और समाज कल्याण अधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. इतना ही नहीं कई मुकदमों की चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है. उधर, राज्य के अन्य 11 जनपदों सहित उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और हरियाणा जैसे निजी शिक्षण संस्थानों पर भी छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप है, जिस पर कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

हरिद्वार: बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने एक और गिरफ्तार की है. अब एसआईटी ने हरिद्वार के पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. एसआईटी से जुड़े 55 मुकदमों में अनुराग शंखधर का नाम है.

बता दें, समाज कल्याण विभाग ने अनुराग शंखधर को निलंबित किया हुआ है. इससे पहले भी शंखधर को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था. आरोपी को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर देहरादून कोर्ट में पेश किया जाएगा. अनुराग शंखधर उप परियोजना निदेशक के पद पर तैनात थे.

इससे पहले घोटाले में एसआईटी ने देहरादून के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार को गिरफ्तार किया था. राम अवतार सिंह के खिलाफ डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए सहारनपुर के एक इंस्टीट्यूट को फर्जी तरीके से करीब 27 लाख रुपये की छात्रवृत्ति जारी की थी. ये छात्रवृत्ति की इंस्टीट्यूट के मालिकों और अधिकारियों ने आपस में बांट ली.

हाईकोर्ट के आदेश पर दो SIT कर रही जांच: बता दें, साल 2011 से 17 तक उत्तराखंड में 500 करोड़ से अधिक का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया था. इस घोटाले में बंदरबांट का मामला इस रूप में सामने आया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों में निजी शिक्षण संस्थानों को बिना सत्यापन के समाज कल्याण अधिकारी द्वारा करोड़ों रुपए का छात्रवृत्ति धन आवंटित किया गया. अधिकतर जांच में यह बात सामने आई कि निजी शिक्षण संस्थानों ने बिना एडमिशन किए ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकार को गुमराह कर छात्रवृत्ति का धन गबन किया.

पढ़ें- 500 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: पूर्व समाज कल्याण अधिकारी रामअवतार अरेस्ट

इस गंभीर फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश में राज्य में 2 विशेष SIT जांच टीम का गठन किया गया था. एक SIT जो देहरादून और हरिद्वार में सबसे बड़े पैमाने में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही है. इसका नेतृत्व आईपीएस मंजूनाथ टीसी कर रहे हैं. वहीं, अन्य 11 जनपदों में हुई छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आईजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में दूसरे नंबर की SIT कर रही है.

अभी तक इस घोटाले में बड़े स्तर पर देहरादून और हरिद्वार स्थित निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा समाज कल्याण अधिकारियों की मिलीभगत सामने आयी है. जिसके चलते दोनों ही जनपदों के कई आरोपी शिक्षण संस्थानों के संचालक और समाज कल्याण अधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. इतना ही नहीं कई मुकदमों की चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है. उधर, राज्य के अन्य 11 जनपदों सहित उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और हरियाणा जैसे निजी शिक्षण संस्थानों पर भी छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप है, जिस पर कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

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