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Major Durga Malla: 23 जनवरी को होगा शहीद दुर्गा मल्ल डाक टिकट का विमोचन

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Published : Jan 21, 2023, 4:23 PM IST

शहीद दुर्गा मल्ल डाक टिकट का विमोचन 23 जनवरी को किया जाएगा. राज्यपाल गुरमीत सिंह शहीद दुर्गा मल्ल डाक टिकट का विमोचन करेंगे. इस मौके पर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के जीवन पर आधारित लघु नाटिका का मंचन भी किया जाएगा. इसके अलावा आर्मी बैंड डिस्प्ले और सेना के जवानों की ओर से सुप्रसिद्ध खुखरी डांस भी होगा.

Shaheed Durga Malla Post Stamp
23 जनवरी को होगा शहीद दुर्गा मल्ल डाक टिकट का विमोचन

देहरादून: आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया है. इसी को लेकर उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति और सहयोगी संस्थाओं की तरफ से 23 जनवरी को आजाद हिंद फौज के नेता सुभाष चंद्र बोस के जन्म दिवस पर अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल डाक टिकट विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस डाक टिकट का विमोचन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों होगा. इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा भी मौजूद रहेंगे.

बता दें शहीद मेजर दुर्गा मल का जन्म 1 जुलाई 1913 को हुआ था. उनकी मृत्यु 25 अगस्त 1944 को हुई थी. वह आजाद हिंद फौज के प्रथम गोरखा सैनिक से. जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. उनका जन्म देहरादून के निकट डोईवाला में गोरखा राइफल के नायब सूबेदार गंगाराम मल्ल क्षेत्री और पार्वती देवी के घर पर हुआ था. उन्होंने गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज गढ़ी कैंट देहरादून से अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की थी.

पढे़ं- Steel Factories Sealed: कोटद्वार में मानकों की धज्जियां उड़ा रही थी स्टील फैक्ट्रियां, डीएम ने किया सील

उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति के अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा ने बताया सन 1931 में मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने गोरखा राइफल में भर्ती होकर 10 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी. जब 1 सितंबर 1942 में सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का गठन हुआ तो उनकी देशभक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी. आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए. जिस से प्रभावित होकर सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें मेजर की पदवी से भी नवाजा. बाद में उन्हें गुप्तचर शाखा का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा, लेकिन 27 मार्च 1944 को महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्रित करते समय मेजर दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सेना ने मणिपुर के कोहिमा के पास उखरुल में पकड़ लिया.

पढे़ं- Negligence in all weather road: निर्माण एजेंसी की लापरवाही से 25 गांवों के लोग परेशान, रास्ता तोड़ा

युद्ध बंदी रहते हुए उन्हें कई कठिन यात्राएं दी गई. उन्हें माफी मांगने को कहा गया, परंतु आजादी के दीवाने कई जाने वाले दुर्गा मल्ल ने माफी नहीं मांगी. 25 अगस्त 1944 को उन्हें फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया गया. मीडिया प्रभारी परिभाषा ने बताया इस मौके पर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के जीवन पर आधारित लघु नाटिका का मंचन भी किया जाएगा. इसके अलावा आर्मी बैंड डिस्प्ले और सेना के जवानों की ओर से सुप्रसिद्ध खुखरी डांस भी होगा.

देहरादून: आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया है. इसी को लेकर उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति और सहयोगी संस्थाओं की तरफ से 23 जनवरी को आजाद हिंद फौज के नेता सुभाष चंद्र बोस के जन्म दिवस पर अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल डाक टिकट विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस डाक टिकट का विमोचन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों होगा. इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा भी मौजूद रहेंगे.

बता दें शहीद मेजर दुर्गा मल का जन्म 1 जुलाई 1913 को हुआ था. उनकी मृत्यु 25 अगस्त 1944 को हुई थी. वह आजाद हिंद फौज के प्रथम गोरखा सैनिक से. जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. उनका जन्म देहरादून के निकट डोईवाला में गोरखा राइफल के नायब सूबेदार गंगाराम मल्ल क्षेत्री और पार्वती देवी के घर पर हुआ था. उन्होंने गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज गढ़ी कैंट देहरादून से अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की थी.

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उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति के अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा ने बताया सन 1931 में मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने गोरखा राइफल में भर्ती होकर 10 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी. जब 1 सितंबर 1942 में सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का गठन हुआ तो उनकी देशभक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी. आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए. जिस से प्रभावित होकर सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें मेजर की पदवी से भी नवाजा. बाद में उन्हें गुप्तचर शाखा का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा, लेकिन 27 मार्च 1944 को महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्रित करते समय मेजर दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सेना ने मणिपुर के कोहिमा के पास उखरुल में पकड़ लिया.

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युद्ध बंदी रहते हुए उन्हें कई कठिन यात्राएं दी गई. उन्हें माफी मांगने को कहा गया, परंतु आजादी के दीवाने कई जाने वाले दुर्गा मल्ल ने माफी नहीं मांगी. 25 अगस्त 1944 को उन्हें फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया गया. मीडिया प्रभारी परिभाषा ने बताया इस मौके पर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के जीवन पर आधारित लघु नाटिका का मंचन भी किया जाएगा. इसके अलावा आर्मी बैंड डिस्प्ले और सेना के जवानों की ओर से सुप्रसिद्ध खुखरी डांस भी होगा.

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