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दो दिवसीय मां अनुसूया देवी मेले के शुभारंभ, दरबार पहुंची देवियों डोलियां, भक्तिमय हुआ माहौल - Maa Anusuya Devi fair

Maa Anusuya Devi fair मां अनुसूया देवी का दो दिवसीय मेला शुरू हो गया है. इस मंदिर में सम्पूर्ण भारत से हर वर्ष निसंतान दंपत्ति पहुंचते हैं. ये दंपत्ति संतान कामना को लेकर मां से आशीर्वाद की कामना करते हैं.

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दो दिवसीय मां अनुसूया देवी मेले के शुभारंभ
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : Dec 25, 2023, 9:24 PM IST

चमोली/गैरसैंण: संतान दायिनी शक्ति शिरोमणि माता अनसूया का दो दिवसीय मेला विधि विधान व पूजा-पाठ के साथ सोमवार को शुरू हो गया. राज्यमंत्री चण्डी प्रसाद भट्ट एवं बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने मेले का शुभारंभ किया. दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर क्षेत्र की सभी देवियों डोलियां भी सती मां अनसूया के दरबार पहुंची. मां अनसूया मंदिर में दत्तात्रेय जयंती पर सम्पूर्ण भारत से हर वर्ष निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते है.जिला प्रशासन ने मेले के दौरान पूरे पैदल मार्ग पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए हैं.

विदित हो कि पौराणिक काल से दत्तात्रेय जयंती पर हर वर्ष सती माता अनसूया में दो दिवसीय मेला लगता है. मां अनुसूया मेले में निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि मां के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता. मां सबकी झोली भरती है. इसलिए निसंतान दंपत्ति पूरी रात जागकर मां की पूजा अर्चना कर करते हैं.

पढ़ें- उत्तराखंड में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को किया गया याद, CM धामी ने मूर्ति का किया अनावरण

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को संतान की प्राप्ति होती है. मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर माता अनुसूया ने अपने तप के बल पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और शंकर) को शिशु रूप में परिवर्तित कर पालने में खेलने पर मजबूर कर दिया था. बाद में काफी तपस्या के बाद त्रिदेवों को पुनः उनका रूप प्रदान किया. फिर यहीं तीन मुख वाले दत्तात्रेय का जन्म हुआ. इसी के बाद से यहां संतान की कामना को लेकर लोग आते हैं. यहां दत्तात्रेय मंदिर की स्थापना भी की गई है. बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मां अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेनी चाही थी, तब उन्होंने तीनों को शिशु बना दिया. यही त्रिरूप दत्तात्रेय भगवान बने. उनकी जयंती पर यहां मेला और पूजा अर्चना होती है.

चमोली/गैरसैंण: संतान दायिनी शक्ति शिरोमणि माता अनसूया का दो दिवसीय मेला विधि विधान व पूजा-पाठ के साथ सोमवार को शुरू हो गया. राज्यमंत्री चण्डी प्रसाद भट्ट एवं बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने मेले का शुभारंभ किया. दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर क्षेत्र की सभी देवियों डोलियां भी सती मां अनसूया के दरबार पहुंची. मां अनसूया मंदिर में दत्तात्रेय जयंती पर सम्पूर्ण भारत से हर वर्ष निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते है.जिला प्रशासन ने मेले के दौरान पूरे पैदल मार्ग पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए हैं.

विदित हो कि पौराणिक काल से दत्तात्रेय जयंती पर हर वर्ष सती माता अनसूया में दो दिवसीय मेला लगता है. मां अनुसूया मेले में निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि मां के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता. मां सबकी झोली भरती है. इसलिए निसंतान दंपत्ति पूरी रात जागकर मां की पूजा अर्चना कर करते हैं.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को संतान की प्राप्ति होती है. मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर माता अनुसूया ने अपने तप के बल पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और शंकर) को शिशु रूप में परिवर्तित कर पालने में खेलने पर मजबूर कर दिया था. बाद में काफी तपस्या के बाद त्रिदेवों को पुनः उनका रूप प्रदान किया. फिर यहीं तीन मुख वाले दत्तात्रेय का जन्म हुआ. इसी के बाद से यहां संतान की कामना को लेकर लोग आते हैं. यहां दत्तात्रेय मंदिर की स्थापना भी की गई है. बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मां अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेनी चाही थी, तब उन्होंने तीनों को शिशु बना दिया. यही त्रिरूप दत्तात्रेय भगवान बने. उनकी जयंती पर यहां मेला और पूजा अर्चना होती है.

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