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लॉकडाउन ने मंदिरों पर जड़े ताले, भक्तों ने लिखी भगवान को चिट्ठी - devotees upset with lockdown

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिले में लॉकडाउन के चलते देवस्थानों पर ताले लगे हुए हैं. इसके चलते मजबूर श्रद्धालु अपनी मुरादें पूरी करने के लिए चिट्ठी लिखकर भगवान के चरणों में अर्पित कर रहे हैं.

मुरादों की पर्ची बांधते श्रद्धालु.
मुरादों की पर्ची बांधते श्रद्धालु.
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Published : Jun 1, 2020, 5:25 PM IST

Updated : Jul 1, 2020, 8:12 PM IST

वाराणसी: आस्था और विश्वास एक सिक्के के दो पहलू होते हैं. ईश्वर के प्रति आस्था इंसान में विश्वास बढ़ाती है, लेकिन इन दिनों वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के चलते लोग मंदिरों में नहीं जा पा रहे हैं. हालांकि 8 जून से मंदिरों के खोले जाने की बात तो कही जा रही है, लेकिन अभी भी मंदिर बंद होने की वजह से भक्त भगवान से दूर ही हैं.

जानकारी देते महंत.

धर्मनगरी काशी में कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में बंद दरवाजे के बाहर श्रद्धालु जुटने लगे हैं. श्रद्धालु शादी का निमंत्रण के साथ ही दु:खों को एक कागज में लिखकर मंदिरों के बाहर ही रखकर जा रहे हैं. कहा जाता है कि काशी में आने वाला हर शख्स जब तक बाबा काल भैरव के दरबार में हाजिरी नहीं लगाता, उसकी काशी यात्रा पूरी नहीं होती. वहीं बिना काल भैरव की अनुमति के काशी में प्रवेश भी संभव नहीं है.

यही वजह है कि श्रद्धालु बंद दरवाजे पर हाथ जोड़कर विनती करने के बाद निमंत्रण पत्र बाबा के चरणों में अर्पित कर रहे हैं. वहीं कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए भी बाबा काल भैरव से अर्जी लगा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें- वाराणसी: लॉकडाउन से कुलियों के आगे गहराया रोजी-रोटी का संकट, आर्थिक संकट से जूझ रहा परिवार

वाराणसी: आस्था और विश्वास एक सिक्के के दो पहलू होते हैं. ईश्वर के प्रति आस्था इंसान में विश्वास बढ़ाती है, लेकिन इन दिनों वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के चलते लोग मंदिरों में नहीं जा पा रहे हैं. हालांकि 8 जून से मंदिरों के खोले जाने की बात तो कही जा रही है, लेकिन अभी भी मंदिर बंद होने की वजह से भक्त भगवान से दूर ही हैं.

जानकारी देते महंत.

धर्मनगरी काशी में कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में बंद दरवाजे के बाहर श्रद्धालु जुटने लगे हैं. श्रद्धालु शादी का निमंत्रण के साथ ही दु:खों को एक कागज में लिखकर मंदिरों के बाहर ही रखकर जा रहे हैं. कहा जाता है कि काशी में आने वाला हर शख्स जब तक बाबा काल भैरव के दरबार में हाजिरी नहीं लगाता, उसकी काशी यात्रा पूरी नहीं होती. वहीं बिना काल भैरव की अनुमति के काशी में प्रवेश भी संभव नहीं है.

यही वजह है कि श्रद्धालु बंद दरवाजे पर हाथ जोड़कर विनती करने के बाद निमंत्रण पत्र बाबा के चरणों में अर्पित कर रहे हैं. वहीं कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए भी बाबा काल भैरव से अर्जी लगा रहे हैं.

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Last Updated : Jul 1, 2020, 8:12 PM IST
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